हाईकोर्ट ने रोहतक के डीसी को आदेश दिया है कि वह सुप्रीम कोर्ट के 18 जनवरी 2013 के फैसले के बाद रोहतक में स्थापित सभी मूर्तियों का विवरण दें। इसमें मूर्तियों की स्थापना की तिथि और जिन व्यक्तियों की मूर्तियां लगाई गई हैं, उनके नाम शामिल हैं।
रोहतक में सार्वजनिक भूमि पर मेयर के पिता किशन दास की प्रतिमा को लगाने के मामले में हाईकोर्ट ने कहा कि आप पिता की मूर्ति चौराहे पर लगाकर कौन सा सम्मान दे रहे हैं। बेहतर है इसे आप खुद हटा दें और अपने घर पर लगाएं, वहां सही सम्मान मिलेगा।
विज्ञापन
हाईकोर्ट ने रोहतक के डीसी को आदेश दिया है कि वह सुप्रीम कोर्ट के 18 जनवरी 2013 के फैसले के बाद रोहतक में स्थापित सभी मूर्तियों का विवरण दें। इसमें मूर्तियों की स्थापना की तिथि और जिन व्यक्तियों की मूर्तियां लगाई गई हैं, उनके नाम शामिल हैं।
सुनवाई के दौरान यह भी बताया गया कि पंडित श्री राम शर्मा की मूर्ति भी हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण की भूमि पर स्थापित की गई है। इस बात की पुष्टि वीसी के जरिए उपस्थित रोहतक नगर निगम के आयुक्त धर्मेंद्र द्वारा भी की गई। सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि किशन दास की मूर्ति सार्वजनिक भूमि पर स्थापित की गई है। हालांकि, उन्होंने यह तर्क दिया कि याचिकाकर्ता का इस मामले में व्यक्तिगत स्वार्थ है, क्योंकि वह और उसका भाई मेयर के किरायेदार रहे हैं और याचिकाकर्ता ने इस तथ्य को कोर्ट से छिपाया है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को इस संबंध में एक संक्षिप्त उत्तर दाखिल करने का निर्देश दिया है।
विज्ञापन
याचिका दाखिल करते हुए रोहतक निवासी देवेंद्र शर्मा ने हाई कोर्ट को बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने 2013 में आदेश दिया था कि सरकार भूमि पर किसी भी प्रतिमा को स्थापित करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। इसके बाद इसी वर्ष तत्कालीन मुख्यमंत्री के पिता की प्रतिमा को स्थापित किया गया था जिसके खिलाफ याची ने जनहित याचिका दाखिल की थी। जनहित याचिका पर सरकार ने जानकारी दी थी कि इस प्रतिमा को हटा दिया गया है।
2018 में सुप्रीम कोर्ट ने सभी हाई कोर्ट को आदेश दिया था कि वह निगरानी करें और सरकारी भूमि पर ऐसी सभी प्रतिमाओं की पहचान कर उन्हें हटवाएं। इसके बाद जुलाई 2023 में हरियाणा सरकार ने रोहतक के मेयर के पिता की प्रतिमा को लगाने की अनुमति दे दी। याची ने बताया कि यह प्रतिमा पुलिस बीट बाक्स को हटा कर स्थापित की गई है। याची ने इसके खिलाफ मांगपत्र भी दिया लेकिन कोई लाभ नहीं हुआ।