अपनी तरह के अनोखे मामले में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने मेवात के जिला एवं सत्र न्यायाधीश व एसपी को तलब कर लिया है। मामला बच्चे की जमानत रद्द करने से जुड़ा हुआ है। याचिका में बताया गया कि 26 फरवरी 2017 को जब उसका विवाह हुआ तो वह 15 साल का था और उसकी पत्नी 21 साल की।
इसके बाद 31 अक्तूबर को अचानक एक दिन पत्नी ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। एफआईआर दर्ज की गई और याची को गिरफ्तार किया गया। याची ने जमानत के लिए सेशन कोर्ट में अपील की, जहां अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने उसकी जमानत याचिका को खारिज कर दिया।
याची व प्रतिवादियों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि यह बड़ा ही दुर्भाग्यपूर्ण मामला है। एक बच्चे के साथ कानूनी प्रक्रिया आरंभ करते हुए जुवेनाइल जस्टिस एक्ट का ध्यान नहीं रखा गया। मामले में एफआईआर की नौबत आई तो क्यों जुवेनाइल पुलिस या वेलफेयर पुलिस ऑफिसर को शामिल नहीं किया गया।
इसके साथ ही कोर्ट ने निचली अदालतों में बच्चों के मामलों में दिखाई गई अंसेवदनशीलता पर भी चिंता व्यक्त की। कोर्ट ने कहा कि इस प्रकार के मामलों में जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के प्रावधानों को ध्यान में रखकर ही आपराधिक मामले को आगे बढ़ाना चाहिए। इस प्रकार का व्यवहार बच्चे के लिए शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना का कारण बन सकता है, जिससे उसका भविष्य प्रभावित हो सकता है।
कोर्ट ने अगली सुनवाई में मामले को लेकर मेवात के जिला एवं सत्र न्यायाधीश व एसपी को तलब कर लिया है। बता दें कि जिला एवं सत्र न्यायाधीश को तलब करने का आदेश न्यायपालिका के इतिहास में बहुत कम मिलता है।