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Highcourt: पुलिस ने रोका तो वहीं से मानी जाएगी गिरफ्तारी, 24 घंटे की सीमा कागज नहीं, वास्तविक हिरासत से तय

Sat, 18 Apr 2026 08:14 AM IST
Nivedita न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

मामला अमृतसर में ट्रामाडोल टैबलेट बरामदगी से जुड़ी जांच से सामने आया। याचिकाकर्ता को 31 अक्टूबर 2025 की रात करीब 11 बजे देहरादून से एजेंसी ने अपने साथ रखा और अगले दिन भी वह उनके नियंत्रण में रहा। हालांकि उसकी औपचारिक गिरफ्तारी 1 नवंबर रात 9 बजे दिखाई गई और 2 नवंबर दोपहर उसे मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया।
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पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़े एक अहम फैसले में स्पष्ट किया है कि जैसे ही पुलिस या जांच एजेंसी किसी व्यक्ति की आवाजाही रोक देती है, उसी क्षण से उसे गिरफ्तार माना जाएगा। अदालत ने कहा कि मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश करने की 24 घंटे की संवैधानिक समयसीमा भी उसी समय से शुरू होगी, न कि कागजों में दर्ज गिरफ्तारी के समय से।
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यह मामला अमृतसर में ट्रामाडोल टैबलेट बरामदगी से जुड़ी जांच से सामने आया। याचिकाकर्ता को 31 अक्टूबर 2025 की रात करीब 11 बजे देहरादून से एजेंसी ने अपने साथ रखा और अगले दिन भी वह उनके नियंत्रण में रहा। हालांकि उसकी औपचारिक गिरफ्तारी 1 नवंबर रात 9 बजे दिखाई गई और 2 नवंबर दोपहर उसे मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया।

जस्टिस सुमित गोयल ने पाया कि याची को न्यायिक अनुमति के बिना 24 घंटे से अधिक समय तक हिरासत में रखा गया जो संविधान का उल्लंघन है। इस आधार पर अदालत ने उसकी रिहाई के आदेश दिए।
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अदालत ने स्पष्ट किया कि जांच एजेंसियां पूछताछ या रोककर रखने जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर गिरफ्तारी को टाल नहीं सकतीं। यदि व्यक्ति अपनी इच्छा से कहीं नहीं जा सकता तो वह गिरफ्तारी ही मानी जाएगी।

कोर्ट ने कहा कि गिरफ्तारी मेमो या पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज समय निर्णायक नहीं है। मजिस्ट्रेटों को निर्देश दिए गए कि वे केवल दस्तावेजों पर निर्भर न रहें बल्कि वास्तविक परिस्थितियों को देखकर गिरफ्तारी का समय तय करें।
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