किसी अपराध में इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबर के रजिस्टर्ड मालिक की यह दलील कि वह नंबर इस्तेमाल नहीं कर रहा है उसे आरोप मुक्त करने के लिए काफी नहीं है। नंबर के मालिक को यह स्पष्ट करना होगा कि कैसे उसके फोन का इस्तेमाल इस अपराध के लिए किया गया। यह टिप्पणी करते हुए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने धोखाधड़ी व आईटी एक्ट में दर्ज एफ आई आर में अग्रिम जमानत की मांग को लेकर दाखिल याचिका को खारिज कर दिया।
मामला मोहाली का है, जहां पर फर्जी कॉल करने का आरोप लगाते हुए आईटी एक्ट में एफआईआर दर्ज की गई थी। इस मामले में जो सिम कार्ड इस्तेमाल किया गया था वह शुभम सिंह के नाम पर दर्ज था। याचिकाकर्ता ने कहा कि इस मामले में उसका नाम सजेशन शामिल किया जा रहा है जबकि फोन कॉल उसने नहीं किए थे। पंजाब सरकार की ओर से दलील दी गई कि केवाईसी के उपरांत इस सिम कार्ड जारी किया गया था।
केवाईसी में याचिकाकर्ता ने अपने अंगूठे का निशान दिया था पर ऐसे में इस नंबर के लिए वह पूरी तरह से जिम्मेदार है। जस्टिस एचएस सेठी ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद कहा कि नंबर याचिकाकर्ता के नाम पर रजिस्टर्ड है और केवाईसी के उपरांत जारी किया गया है। याचिकाकर्ता की यह दलील की फोन का इस्तेमाल नहीं कर रहा था नंबर के प्रति उसकी जिम्मेदारी खत्म करने के लिए काफी नहीं है।
याचिकाकर्ता को यह बताना होगा कि नंबर का इस्तेमाल कौन कर रहा था और अपराध में वह शामिल नहीं है इससे साबित करना होगा। कोर्ट ने कहा कि अभी तक फोन रिकवर नहीं हुआ है ऐसे में हिरासत में पूछताछ जरूरी है इसलिए याचिकाकर्ता को अग्रिम जमानत देने का कोई औचित्य नहीं बनता है।