पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट ने एक बेहद अहम फैसला सुनाते हुए स्पष्ट कर दिया कि ड्राइवर का लाइसेंस अवैध हो तो भी बीमा कंपनी को क्लेम का भुगतान करना होगा। अपने फैसले में हाईकोर्ट ने कहा कि लाइसेंस अवैध होने की दलील देते हुए बीमा कंपनी अपनी जिम्मेदारी से नहीं भाग सकती है। मामला 1996 का है, जब एक ट्रक चालक की हादसे में मौत हो गई थी।
मृतक की होशियारपुर निवासी पत्नी को क्लेम की राशि का भुगतान करने के आदेश दिए गए थे। इस आदेश को चुनौती देते हुए कंपनी ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। बीमा कंपनी ने अपनी याचिका में कहा कि कंपनी क्लेम देने के लिए बाध्य नहीं है, क्योंकि ड्राइवर के पास वैध लाइसेंस नहीं था। कंपनी ने यह भी अपील की कि क्लेम राशि देने की स्थिति में उसे वाहन मालिक से रिकवरी का अधिकार दिया जाए।
हाईकोर्ट ने केस से जुड़े विभिन्न पहलुओं को सुनने के बाद अपना फैसला सुनाते हुए यह स्पष्ट कर दिया कि बीमा कंपनी को ड्राइवर के साथ हुए हादसे की स्थिति में भुगतान करना ही होगा। लाइसेंस सही न होने, फर्जी होने या वैध न होने की दलील देते हुए बीमा कंपनी अपनी जिम्मेदारी से भाग नहीं सकती है। साथ ही हाईकोर्ट ने कहा कि क्लेम भुगतान करने के बाद वाहन मालिक से रिकवरी का अधिकार देने की कंपनी की अपील भी नहीं मानी जा सकती है।
इस मामले में बीमा कंपनी के खिलाफ फैसला देते हुए हाईकोर्ट ने अपील खारिज कर दी।