पंजाब में माननीयों के खिलाफ आपराधिक मामलों में जहां दो माह पहले 42 केस की जांच लंबित थी। हाईकोर्ट की फटकार के बाद पुलिस ने तेजी दिखाते हुए 23 मामलों की जांच पूरी कर ली है। अब केवल 19 मामलों की जांच लंबित रह गई है। मंगलवार को पंजाब सरकार की तरफ से ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन ने हाईकोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट दायर कर बताया कि 29 नवंबर तक पंजाब के पूर्व और मौजूदा सांसदों/विधायकों के खिलाफ दर्ज मामलों में 19 मामलों की जांच बाकी है।
102 मामलों का ट्रायल राज्य की विभिन्न अदालतों मे लंबित है। 29 सितंबर को 42 मामलों की जांच लंबित थी और पंजाब पुलिस व अन्य एजेंसियों ने जांच में तेजी लाते हुए 23 मामलों की जांच पूरी कर ली है। 2013 से लेकर 2015 के बीच दर्ज किसी भी मामले की जांच अब लंबित नहीं है। देशभर के पूर्व और मौजूदा सांसदों/विधायकों के खिलाफ दर्ज मामलों और चल रहे ट्रायल में हो रही देरी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने देश के विभिन्न हाईकोर्ट को आदेश दिया था कि इस मामले में संज्ञान लेकर सुनवाई की जाए। हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार की ओेर दी गई इस जानकारी को रिकॉर्ड में लेते हुए सुनवाई 19 जनवरी तक स्थगित कर दी है।
पंजाब के इन माननीयों के खिलाफ जांच लंबित
पूर्व विधायक बिक्रमजीत सिंह मजीठिया, पूर्व विधायक अनिल जोशी, विधायक शीतल अंगुराल, पूर्व विधायक सिमरजीत बैंस, विधायक अमनशेर सिंह शेरी कलसी, पूर्व विधायक सुच्चा सिंह छोटेपुर, पूर्व विधायक फतेहजंग बाजवा, विधायक दलबीर सिंह, पूर्व विधायक हरदयाल सिंह कंबोज, विधायक अमरिंदर सिंह, राजा वड़िंग, विधायक सुखपाल सिंह खैरा, विधायक लखबीर सिंह राय, विधायक रुपिंदर सिंह हैप्पी, विधायक मनतार सिंह बराड़, पूर्व विधायक अजीत इंदर सिंह, पूर्व सांसद बलविंदर सिंह भुंदड़, पूर्व विधायक सुखविंदर सिंह औलख, पूर्व विधायक जगदीप सिंह, पूर्व विधायक भारत भूषण आशु, पूर्व विधायक सुंदर शाम अरोड़ा, पूर्व विधायक साधु सिंह धर्मसोत और पूर्व विधायक संगत सिंह गिलजियां शामिल हैं।