संगत दर्शन कार्यक्रम में मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल
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नौकरी में एक्टेंशन पाने के लिए सरकार ने राज्य पुरस्कार जीतने वालों के सामने बड़ी ही अनोखी शर्त रखी है, जिसे सुनकर सभी हैरान रह गए। राज्य पुरस्कार जीत चुके टीचरों को दोबारा नौकरी पर रखने के लिए पंजाब सरकार ने अजीब शर्त लगा दी है।
सरकार की ओर से जारी शर्त में कहा गया है कि पेंशन लागू होने के एक साल बाद दोबारा नौकरी पाने के इच्छुक स्टेट अवार्डी टीचरों को पुरस्कार के तौर पर मिली राशि ब्याज सहित लौटानी होगी। यह खुलासा पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के एडवोकेट एचसी अरोड़ा द्वारा आरटीआई के तहत मांगी गई सूचना के जवाब में हुआ है।
आरटीआई में मांगी गई जानकारी में खुलासा
ममदोट (फिरोजपुर) के गांव गजनीवाला में मुख्यमंत्री समस्या सुनते हुए
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निदेशक, पब्लिक इंस्ट्रक्शन (सेकेंडरी एजुकेशन) कार्यालय से सूचना पाने के लिए आरटीआई के तहत राज्य जनसूचना अधिकारी को सौंपे गए आवेदन में जानकारी मांगी गई थी कि स्टेट अवार्डी या लाइफ टाइम एचीवमेंट अवार्ड प्राप्त टीचरों को नौकरी में एक्सटेंशन दिए जाने के बारे में मौजूदा स्थिति क्या है।
इसके जवाब में राज्य जनसूचना अधिकारी की ओर से 17 अक्तूबर को भेजे गए पत्र के साथ शिक्षा विभाग द्वारा 9 अक्तूबर, 1989 को जारी पत्र की प्रति भी लगाई गई है। इसमें कहा गया है कि पंजाब शिक्षा विभाग के जो टीचर स्टेट अवार्ड जीत चुके हैं, अगर वे शारीरिक व मानसिक स्तर पर फिट हैं तो वे पेंशन शुरू होने के बाद एक साल और सेवा में रहने के हकदार हैं।
विभाग के पास जमा करानी होगी अवार्ड राशि
CM Badal
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हालांकि शिक्षा विभाग के पत्र में यह भी कहा गया है कि एक साल का एक्सटेंशन पाने के इच्छुक स्टेट अवार्डी टीचरों को अवार्ड में मिली धनराशि विभाग के पास जमा करानी होगी। इसके अलावा स्टेट अवार्डियों को यह हलफनामा भी देना होगा कि वे विभाग के पास जमा अवार्ड की राशि पर राज्य सरकार द्वारा तय दर पर ब्याज भी देने को तैयार हैं।
उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार द्वारा राज्यस्तरीय अवार्ड के रूप में केवल 25 हजार रुपये पुरस्कार विजेता को प्रदान किए जाते हैं। जबकि लाइफ टाइम एचीवमेंट के लिए एक लाख रुपये दिए जाते हैं। राज्य जनसूचना अधिकारी के उक्त जवाब पर आपत्ति जताते हुए एडवोकेट अरोड़ा ने पंजाब के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर शिक्षा विभाग द्वारा लगाई गई पुरस्कार राशि वापस लेने के शर्त को वापस लेने की मांग की है।