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सुसाइड नोट से खुला पंजाब इकोनॉमी का 'काला' सच

Thu, 19 Mar 2015 02:24 PM IST
संजय अभिज्ञान/अमर उजाला, चंडीगढ़
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बुधवार सुबह जब पंजाब के बजट में खुदकुशी करने वाले किसानों के परिवारों के लिए राहत का ऐलान किया जा रहा था, मंडी गोबिंदगढ़ के व्यापारी राजेश गुप्ता जिंदगी की जंग हार चुके थे।
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मंगलवार शाम को ढींढसा बजट में लिख रहे होंगे कि पंजाब में कोई नया टैक्स नहीं वसूला जाएगा और उसी शाम राजेश अपने सुसाइड नोट में लिख रहे थे कि पुराने टैक्स वाली मशीनरी से परेशान होकर वे जहर खा रहे हैं।

राजेश गुप्ता की मौत एक साथ कई सवाल परोस रही है। वह बता रही है कि पंजाब में इंडस्ट्री का भी एग्रीकल्चर की ही तरह खाना खराब है। किसान अगर फसल या जमीन हाथ से जाने पर मौत को गले लगा रहा है तो उद्यमी-व्यापारी अपनी पूंजी हाथ से जाने पर सिर पीट रहे हैं।
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इसी पंजाब में ई-ट्रिप ने महीनों व्यापारियों को खून के आंसू रुलाए। इसी राज्य में एडवांस टैक्स ने इंडस्ट्री को नाकों चने चबवाए। ...और अब राज्य के एक ईटीओ यानी एक्साइज-सेल्स टैक्स ऑफिसर के ही सिर यह इल्जाम आया है कि उसने एक जवान और उदीयमान व्यापारी को कानून के जाल में इस कदर उलझा दिया कि उसने जहर खाना कबूल कर लिया।
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तकलीफदेह और ब्लैकमेलिंग भरा टैक्स का मकड़जाल

संदेश साफ है। टैक्स का मकड़जाल इतना तकलीफदेह और ब्लैकमेलिंग से भरा है कि उसके आगे जहर खाने से होने वाली छटपटाहट भी तुच्छ लगती है। इसका मतलब यह है कि राज्य की टैक्स मशीनरी बहुत बदनाम और बीमार हो चुकी है।

इसका मतलब यह भी है कि एक बेहद बदनाम महकमा अब लोगों के खून का भी प्यासा हो गया है। बजट में एक और कमाल हुआ है। उसमें रेवेन्यू डेफिसिट घाटा बढ़ा दिया गया है।

रेवेन्यू खर्च का मतलब है अफसरों की सेलरी, भत्तों, परिवहन, यात्रा, ब्याज भुगतान आदि पर होने वाला सरकारी खर्च। मतलब टैक्स से अफसरों के वेतन आदि फलते फूलते रहेंगे। राजेश गुप्ता के हत्यारे अफसरों के भत्तों में कोई कटौती नहीं होगी।

सवाल फिलहाल यही है। जान देने वाली किसानों की फैमिली के आंसू पोंछने का इंतजाम तो होगा। जान देने वाले व्यापारियों के परिवारों का क्या होगा। और यह भी साफ हो जाए कि किसानों और व्यापारियों के बाद अगला नंबर किसका होगा खुदकुशी को मजबूर होने वालों के क्लब में?
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