ड्रग्स के मामलों की मॉनीटरिंग के लिए पंजाब सरकार ने एक बड़ी कवायद की है। साथ ही केंद्रीय गृह मंत्रालय को जानकारी दे दी गई है। पंजाब में सक्रिय ड्रग रैकेट में पुलिस को वांछित चार एनआरआई की डिटेल और उन्हें भारत लाने की प्रक्रिया के बारे में पंजाब सरकार से केंद्रीय गृह मंत्रालय ने जानकारी मांगी थी।
केंद्र ने सीमा पार से ड्रग तस्करी की रोकथाम को किए गए प्रबंधों पर एक सीलबंद रिपोर्ट भी पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में पेश की है। उधर, पंजाब सरकार ने बताया है कि ड्रग्स के मामलों की मॉनीटरिंग के लिए जिलास्तरीय कमेटियां गठित की जा चुकी हैं।
पंजाब सरकार ने यह भी बताया कि आम लोगों में ड्रग्स के कुप्रभावों की जागरूकता के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। इसके लिए जिला उपायुक्तों की अध्यक्षता में कमेटियां गठित की गई हैं। हाईकोर्ट ने कहा है कि कमेटियों का प्रमुख जिला सिविल सर्जन को बनाया जाए।
उधर, यह भी बताया गया है कि पाठ्यक्रम में नशे के कुप्रभावों की जानकारियां शामिल की जा रही हैं। इधर, हरियाणा ने भी कहा है कि नशे के कुप्रभावों के बारे में जानकारी को पाठ्यक्रम में शामिल किया जा रहा है। यह भी बताया कि नशा तस्करी के मामलों की जानकारी पुलिस से जुटाई जा रही है।
हरियाणा सरकार को हाईकोर्ट की फटकार:
दूसरी ओर हरियाणा सरकार को फटकार लगाते हुए हाईकोर्ट ने कहा है कि कोई अधिकारी पेश न होने से प्रतीत होता है कि वह हाईकोर्ट के आदेश की परवाह नहीं करते। फिलहाल पिछले निर्देश को अगली सुनवाई तक लागू न करने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ उचित निर्देश देने की चेतावनी देते हुए आदेश के अनुपालन को कहा गया है।
उधर, चंडीगढ़ प्रशासन ने बताया है कि ड्रग्स नियंत्रण के लिए कमेटी गठित की जा चुकी है। हाईकोर्ट ने कमेटी पुर्नगठित करने को कहा है और इसमें एनजीओ व एक्सपर्ट्स शामिल करने का निर्देश दिया है।