प्रदेश सरकार की ओर से जल्द ही केंद्र सरकार को अपना महंगाई रोको एक्शन प्लान भेजा जाएगा। यह एक्शन प्लान अगले एक सप्ताह के भीतर भेज दिया जाएगा।
केंद्र सरकार के साथ हाल ही में हुई बैठक में केंद्र की ओर से यह दिशा निर्देश जारी किए गए हैं। इसमें जमाखोरी रोकने के साथ- साथ अन्य उठाए जाने वाले संभावित कदमों के बारे में भी केंद्र को प्लान भेजा जा रहा है। इस प्लान में राज्य सरकार की तरफ से फूड सिक्योरिटी एक्ट में चीनी को भी शामिल करने का फैसला किया गया है।
महंगाई बढ़ाने वाले उत्पाद होंगे मुख्य बिंदु
फूड एंड सप्लाई अधिकारियों के अनुसार एक्शन प्लान तैयार करने का काम शुरू कर दिया गया है। इसमें उन उत्पादों पर ज्यादा ध्यान दिया जाएगा जो महंगाई बढ़ाने का बड़ा कारण हैं।
इसमें आलू व प्याज तो शामिल हैं ही चीनी को भी गरीब वर्ग की पहुंच तक लाया जाएगा। विभागीय सूत्रों के मुताबिक केंद्र सरकार राज्य सरकार को 13.50 रुपये प्रति किलो चीनी पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम के तहत उपलब्ध करवाने को तैयार है। हालांकि लंबे समय से चीनी इस सिस्टम में बंद हो चुकी है।
फूड सिक्योरिटी एक्ट की मांग होगी शामिल
राज्य सरकार अपने एक्शन प्लान में चीनी को भी फूड सिक्योरिटी एक्ट में शामिल करने की मांग एक्शन प्लान में शामिल करने जा रही है। हालांकि इस वितरण से राज्य सरकार वित्तीय बोझ झेलने को तैयार नहीं है।
कारण है कि वितरण सिस्टम के तहत चीनी की कीमत 18.50 रुपये तय की जानी है। लिहाजा इसमें करीब पांच रुपये प्रति किलो राज्य सरकार को झेलने पड़ सकते हैं इसलिए राज्य सरकार एक्शन प्लान में चीनी की कीमत बिना किसी बोझ के 18.50 रुपये प्रति किलो रखने की ही सिफारिश करेगी।
प्याज, आलू को मार्केट कमेटियों से मुक्त करने की योजना
एक्शन प्लान से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक एक्शन प्लान में प्याज एवं आलू को मार्केट कमेटियों से मुक्त करने की भी योजना है। कारण है कि मंडी से होकर गुजरने वाली इन सब्जियों पर आढ़त का बोझ पड़ रहा है।
लिहाजा इन सब्जियों को आढ़त से मुक्त किया जा सकता है ताकि किसान किसी भी शहर में अपनी सब्जी को खुलकर बेच सकें और महंगाई पर नकेल कसी जा सके।
पंजाब में पैरीशेबल गुड्स (जल्द खराब होने वाली सब्जियों) को बचाने के लिये विशेष कोल्ड स्टोर स्थापित करना भी इस एक्शन प्लान का हिस्सा है।
सरकार से फंड की दरकार भी होगी
राज्य सरकार चाहती है कि सब्जियों को संभालने से इनकी वेस्टेज भी रुकेगी और महंगाई के दौरान इसे मार्केट में उतारा जा सकेगा। इसके लिये एक्शन प्लान में केंद्र सरकार से फंड की दरकार की जाएगी।
इसके साथ ही जमाखोरी रोकने के लिये भी राज्य सरकार आलू प्याज के अलावा चीनी के टॉक की भी लिमिट तय करेगी। इस लिमिट से ज्यादा स्टॉक को जमाखोरी माना जायेगा और कार्रवाई की जायेगी।
फूड एंड सप्लाई विभाग के सचिव डीएस ग्रेवाल ने बताया कि जून से दिसंबर तक महंगाई की संभावना प्रबल रहती है। राज्य सरकार का प्रयास रहेगा कि गरीब वर्ग को सस्ता अनाज, सस्ती चीनी मिले। प्याज और आलू की जमाखोरी पूरी तरह रुके। इनसे जुड़े मामलों को ही एक्शन प्लान में शामिल कर जल्द केंद्र को भेजा जाएगा।