पत्र में लिखा गया है कि ये खास निमंत्रण जलियांवाला बाग में अंग्रेजों द्वारा सैकड़ों भारतीयों की निर्मम हत्या के शताब्दी के अवसर पर मिला है। इतना ही नहीं देश में आम चुनाव का माहौल है। लिहाजा वह इसमें शिरकत करने में पूरी तरह से असमर्थ हैं।
बदनौर की ओर से पत्र में कहा गया है कि 1947 में देश के स्वतंत्र होने के बाद से भारत व ब्रिटेन के संबंध बड़े ही बेहतरीन हैं। दोनों देश हर मसले पर एक दूसरे का समर्थन करते रहे हैं। बिजनेस, शिक्षा सहित कई मसलों पर दोनों देश साझा तौर पर काम कर रहे हैं।
दोनों देशों में द्विपक्षीय संबंध भी मजबूत हैं। भारत ब्रिटेन में दूसरा सबसे बड़ा निवेश करने वाला देश है। ब्रिटेन भी भारत में निवेश करने वाले देशों की सूची में सबसे ऊपर है। बदनौर ने पत्र में कहा है कि ब्रिटिश मिनिस्टर मार्क फील्ड ने हाउस आफ कामंस की वेस्ट मिनिस्टर हाल में हुई डिबेट में जलियांवाला बाग हत्याकांड पर अफसोस जाहिर किया था।
उन्होंने कहा था कि ब्रिटेन इस पर माफी मांगने की राह पर है, जिसकी प्रक्रिया चल रही है। उन्होंने यहां तक कहा कि ब्रिटेन की प्रधानमंत्री भी जलियांवाला बाग हत्याकांड को निर्मम हत्याकांड और ब्रिटेन के चेहरे पर एक शर्मनाक धब्बे के तौर पर संबोधित कर सकती हैं।
बदनौर ने लिखा इस सारे प्रकरण को देखते हुए मेरा महारानी एलिजाबेथ के जन्मदिन की पार्टी में आना संभव नहीं है, क्योंकि पंजाब राज्य में इस इश्यू को बहुत ही भावनात्मक मुद्दे के तौर पर देखा जाता है।