पंजाब में मंत्रियों को सरकारी सुविधाओं पर लागू होने वाला आयकर राज्य सरकार द्वारा भरे जाने संबंधी संशोधन विधेयक दि ईस्ट पंजाब मिनिस्टर्स सैलरीज (संशोधन) बिल 2019 को मंजूरी मिल गई है। इस बिल पर सदन में बहस के दौरान मौजूद अकाली दल के सदस्यों ने सवाल खड़े किए।
इसके साथ ही विधानसभा ने उपमंत्रियों के वेतन और भत्तों संबंधी दि सैलरीज एंड अलाउंसेज आफ डिप्टी मिनिस्टर्स पंजाब (संशोधन) बिल 2019 और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के वेतन-भत्तों संबंधी दि सैलरीज एंड अलाइंसेज ऑफ लीडर ऑफ आपोजशिन इन लेजिसलेटिव असेंबली (संशोधन) बिल 2019 को भी मंजूरी दे दी। विधानसभा में वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल ने दि ईस्ट पंजाब मिनिस्टर्स सैलरीज (संशोधन) बिल 2019 पेश किया।
इस पर अकाली दल के चंदूमाजरा ने यह कहते हुए ऐतराज जताया कि वित्त मंत्री हमेशा सरकार का खजाना खाली का हवाला देते रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में किसानों समेत अन्य अहम मुद्दों पर सरकार को पैसों की जरुरत है, इसलिए ऐसे बिल का समर्थन नहीं किया जा सकता। इस पर कांग्रेस के चरणजीत सिंह चन्नी ने कहा कि विपक्षी सदस्यों को बिल को पढ़ लेना चाहिए था। इस बिल के तहत यह प्रावधान किया गया है कि अब सूबे के मंत्री अपने वेतन और भत्तों से संबंधित आयकर खुद भरेंगे और केवल उन्हें मिलने वाली सरकारी सुविधाओं, मकान-वाहन आदि संबंधी आयकर राज्य सरकार भरेगी।
चन्नी ने उदाहरण देते हुए सदन में कहा कि मुख्यमंत्री की आय 13 लाख रुपये बनती है लेकिन आयकर 17 लाख रुपये पर निर्धारित हुआ है। उन्होंने कहा कि पहले लाए गए बिल में इसी खामी को दूर करते हुए नया बिल लाया गया है। चन्नी ने कहा कि चंदूमाजरा ऐतराज तो कर रहे हैं लेकिन उनका आयकर सरकार भर रही है, जिसे छोड़ने को वे तैयार नहीं हैं।
कांग्रेस के कुलजीत नागरा ने अकाली सदस्यों पर निशाना साधते हुए चुनौती दी कि वे अपना आयकर खुद भरें। इस पर अकाली दल के विक्रम सिंह मजीठिया ने उन्हें कहा- सरकार आपकी है। अगर सरकार ऐसा कोई फैसला लेती है तो हम भी साथ हैं। आखिरकार मनप्रीत बादल ने बिल पर स्पष्टीकरण देते हुए अकाली सदस्यों पर कटाक्ष किया कि जिन्होंने 72 साल में कभी टैक्स नहीं दिया, वह इस बिल का विरोध कर रहे हैं।
बाद में इस बिल को सदन ने पारित कर दिया। इसके साथ ही, सदन ने दि सैलरीज एंड अलाउंसेज ऑफ डिप्टी मिनिस्टर्स पंजाब (संशोधन) बिल 2019 और दि सैलरीज एंड अलाइंसेज ऑफ लीडर ऑफ आपोजशिन इन लेजिसलेटिव असेंबली (संशोधन) बिल 2019 को भी अकालियों के विरोध के बीच मंजूरी दे दी।
यह था तीनों बिलों में प्रावधान
पंजाब मंत्रिमंडल के 19 मार्च, 2018 को एक बिल पारित कर मंत्रियों के वेतन और भत्तों संबंधी आयकर का बोझ उन्हीं पर डालने का फैसला लिया था और जरूरी संशोधन करते हुए ‘दी ईस्ट पंजाब मिनिस्टर्स सैलरी एक्ट, 1947’ की धारा-2 सी हटा दी थी। इससे सभी मंत्रियों आदि को मिल रहे सभी सरकारी सुविधाएं भी आयकर के दायरे में आ गई थी। इस कारण कुछ मामलों में आयकर की देनदारी वेतन की अपेक्षा बढ़ गई थी। इस खामी को खत्म करने के लिए मंत्रिमंडल ने धारा 2-सी को फिर से कानून में शामिल करने का फैसला किया।
इसके अधीन केवल वेतन और भत्तों पर मंत्रियों द्वारा आयकर का भुगतान खुद किया जाएगा न कि अन्य सुविधाओं और लाभों पर। प्रस्तावित धारा के अनुसार मंत्रियों को मिलता मुफ्त तैयार घर और अन्य पर आयकर का भुगतान सरकार की तरफ से किया जायेगा। बता दें कि ‘दी ईस्ट पंजाब मिनिस्टर्स सैलरी एक्ट, 1947’ के तहत राज्य सरकार अपने मंत्रियों का आयकर खुद भर्ती रही है। इसमें फेरबदल करते हुए सरकार ने मंगलवार को विधानसभा में दि ईस्ट पंजाब मिनिस्टर्स सैलरीज (संशोधन) बिल 2019 को मंजूरी दी।
इसी तरह, दि सैलरीज एंड अलाउंसेज आफ डिप्टी मिनिस्टर्स पंजाब एक्ट 1956 की धारा 7-ए को हटाते हुए तय किया गया है कि उपमंत्री अपने वेतन और भत्तों संबंधी आयकर खुद वहन करेंगे जबकि उन्हें मिलने वाली सरकारी सुविधाओं का आयकर सरकार अदा करेगी। ऐसा ही प्रावधान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के लिए भी किया गया है, जिसमें दि सैलरीज एंड अलाउंसेज ऑफ लीडर ऑफ आपोजीशन इन लेजिस्लेटिव असेंबरी एक्ट 1978 की धारा 3-ए को हटा दिया गया है।