फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कैप्टन साहब! 1500 करोड़ में कैसे माफ होगा किसानों का कर्ज?

Fri, 14 Jul 2017 10:07 AM IST
हर्ष कुमार सलारिया/अमर उजाला, चंडीगढ़
विज्ञापन
मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह - फोटो : File Photo
विज्ञापन
किसानों का कर्ज माफ करने के लिए सालाना बजट में केवल 1500 करोड़ रुपये का प्रावधान कर विपक्ष के निशाने पर आई कैप्टन अमरिंदर सिंह सरकार को अब अपने विभागों से जूझना पड़ रहा है। कर्ज माफी के मुद्दे पर वीरवार को वित्त विभाग के साथ करीब एक घंटा चली बैठक में सहकारी विभाग के अधिकारियों ने साफ कर दिया कि राज्य सरकार सहकारी बैंकों को कम से कम 3500 करोड़ रुपये अदा करे। तब ही किसानों का कर्ज माफ करने के कारण बिगड़ी बैंकों की माली हालत को संभाला जा सके।
विज्ञापन


खास बात यह है कि सहकारी बैंकों ने 3500 करोड़ रुपये की राशि भी केवल पहले साल के लिए मांगी है। इसका कारण यह है कि  एसएलबीसी के ताजा आंकड़ों के अनुसार, 31 मई 2017 तक सहकारी बैंकों द्वारा कुल 10482 करोड़ रुपये कर्ज के रूप में दिए जा चुके हैं, जिसमें छोटे व मझोले किसानों को 5217 करोड़ रुपये का कर्ज दिया गया है। यानी सरकार ने जो बजट में 1500 करोड़ का प्रावधान रखा है, वह तो सहकारी बैंकों के लिए ही काफी नहीं है। अगर अन्य बैंकों की बात करे तो एक साल में ही किसानों को दिया कर्ज काफी ज्यादा है। बीते एक साल के दौरान ही राज्य के किसानों ने सरकारी, निजी, ग्रामीण व सहकारी बैंकों से 14383 करोड़ रुपये कर्ज के रूप में लिए हैं।

कर्ज की वसूली पर लगा विराम
विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, सहकारी विभाग ने बैठक में यह साफ कर दिया कि किसानों का कर्ज माफ करने की योजना लागू किए जाने के बाद सहकारी बैंकों द्वारा कर्ज और उसके ब्याज की वसूली पूरी तरह रुक चुकी है। बैंकों के पास अपने अस्तित्व को बचाए रखने का कोई विकल्प नहीं बचा है। फिलहाल इस बैठक का कुछ नतीजा नहीं निकला, लेकिन वित्त विभाग के समक्ष सूबे के सहकारी बैंकों की स्थिति रख दी गई है। 
विज्ञापन
विज्ञापन

आसान नहीं सरकार के लिए कर्ज माफी :

मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह - फोटो : File Photo
कैप्टन का था चुनावी वादा
राज्य में नई सरकार के गठन के साथ ही कैप्टन अमरिंदर सिंह ने अपना चुनावी वादा निभाते हुए पंजाब सहकारी सेवाएं एक्ट, 1961 की धारा 67-ए को खत्म कर दिया था, जिसके तहत सहकारी बैंकों को डिफाल्टरों की संपत्ति कुर्क  करने का अधिकार था। सहकारी बैंकों ने कर्ज की वसूली तो रोक दी लेकिन राज्य सरकार ने सहकारी बैंकों को हुए नुकसान की भरपाई नहीं की।

आसान नहीं सरकार के लिए कर्ज माफी
पिछले महीने विधानसभा के बजट सत्र के दौरान वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल ने सूबे के किसानों का कर्ज माफ करने के लिए बजट में 1500 करोड़ रुपये का प्रावधान करते हुए इसे एक साल के दौरान कर्ज माफी के लिए तय राशि बताया था। राज्य सरकार की बड़ी समस्या यह है कि पंजाब के किसानों का कर्ज प्रति वर्ष करीब 14 हजार करोड़ रुपये की दर से बढ़ रहा है। एसएलबीसी से मिले आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2017 तक राज्य में सभी तरह बैंकों ने 31,29,831 लोगों को 8536 लाख रुपये का कृषि कर्ज दिया। इसमें छोटे व मझोले दर्जे के 17,19,038 किसानों को 3660 लाख रुपये कर्ज दिया गया। बैंकों ने किसान क्रेडिट कार्ड योजना के तहत एक अप्रैल, 2016 से 31 मार्च, 2017 तक करीब 14905 करोड़ रुपये कर्ज के रूप में जारी किए। इसमें से 14667.60 करोड़ रुपये अभी कर्जदारों पर बाकी हैं। साल भर में बैंकों को कर्ज राशि की वापसी के रूप में ब्याज सहित 15522 करोड़ रुपये हासिल हो चुके हैं। राज्य सरकार कर्ज माफी के लिए राष्ट्रीयकृत और निजी बैंकों से तालमेल बनाने की कोशिश कर रही है, लेकिन उसके अपने विभाग के अधीन बैंकों ने 3500 करोड़ रुपये की मांग करके कर्ज माफी की वास्तविकता सरकार को दिखा दी है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें