पंजाब सरकार ने निजी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस में खिलाड़ियों और सिख विरोधी दंगों के पीड़ितों के बच्चों व पोते-पोतियों को आरक्षण देने का फैसला किया है। यह आरक्षण सरकारी मेडिकल कॉलेजों में पहले से ही लागू है। अब 11 जुलाई, 2019 को सरकार द्वारा जारी एक संशोधित नोटिफिकेशन में यह आरक्षण निजी कॉलेजों में भी सरकार के 50 प्रतिशत कोटे के तहत देने का फैसला किया है।
एक मामले की सुनवाई करते हुए पंजाब के एडवोकेट जनरल अतुल नंदा ने गुरुवार को पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के सामने यह स्वीकार किया।
हाईकोर्ट में पेश हुए एडवोकेट जनरल ने 11 जुलाई को संशोधित नोटिफिकेशन पेश किया। इसमें 6 जून, 2019 के पहले नोटिफिकेशन को संशोधित किया गया है।
बाद में नंदा ने साफ किया कि इस तरह के आरक्षण का मुद्दा अदालत के सामने कभी नहीं उठा, जिस कारण सरकार द्वारा ऐसे किसी भी स्टैंड को लेने का सवाल नहीं उठता। इससे पहले अदालत ने राज्य से पूछा कि इस तरह के माइक्रो आरक्षण को प्राइवेट कॉलेजों में बकाया 50 प्रतिशत मैनेजमेंट कोटे में लागू किया जा सकता है।
अदालत में बताया गया कि चाहे यह मुद्दा मौजूदा याचिका के क्षेत्र से बाहर है लेकिन अगर यह किसी भी भलाई के कदम के तौर पर सामने आया तो राज्य इसके विरोध में पहुंच नहीं अपनाएगा। एडवोकेट जनरल ने बताया कि इस मुद्दे को विचारा जा सकता है और इस संबंध में फैसला विभिन्न संवैधानिक बेंचों के फैसलों खासकर पीए ईनामदार के फैसले को आगे ले जाने के अदालत के अवसर के बाद लिया जा सकता है। यह केस 19 जुलाई, 2019 तक के लिए स्थगित कर दिया गया है।