पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट
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बावजूद इसके पंजाब सरकार ने ऐसा नहीं किया। पुराना डाटा इस्तेमाल करते हुए एससी वर्ग का प्रतिनिधित्व न होने की बात कही गई। एकत्र आंकडे़ में एससी वर्ग का प्रतिनिधित्व बहुत अधिक है। लेकिन सरकार इन्हें आरक्षण का लाभ देने पर आमादा थी, जिसके चलते आंकड़ों से छेड़छाड़ कर इसे कैबिनेट के सामने पेश किया गया। यह सीधे तौर पर फ्रॉड का मामला बनता है। इसके साथ ही पंजाब सरकार द्वारा इस एक्ट को पास किए जाने से पहले ही गुरुनानक देव यूनिवर्सिटी अमृतसर की सिंडीकेट ने सामान्य श्रेणी के किए गए प्रमोशन को रिव्यू करने का फैसला कर लिया।
याची ने कहा कि जिस प्रकार पंजाब सरकार ने नियमों को ताक पर रखकर यह कार्य किया है उससे याची के प्रमोशन पर खतरा आ गया है। ऐसे में याची ने पंजाब सरकार द्वारा पारित 2018 के प्रमोशन में आरक्षण के लिए बनाए गए एक्ट को खारिज करने की अपील की। याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस राजेश बिंदल एवं जस्टिस बीएस वालिया की खंडपीठ ने पंजाब सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब कर लिया है। इसके साथ ही सामान्य श्रेणी के याचिकाकर्ताओं की प्रमोशन पर यथा स्थिति बनाए रखने के भी आदेश दिए हैं।