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पंजाब सरकार ने जमीन मालिकों से जिम्मेदारी निभाने को कहा, 'ठेके पर दी, पराली जलाने से भी रोंके'

Mon, 14 Oct 2019 12:29 PM IST
खुशबू गोयल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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Straw Burning
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पंजाब सरकार ने ठेके पर जमीन देने वाले लोगों से अपनी जिम्मेदारी निभाने को कहा और उन्हें निर्देश दिया कि वे उनके खेत में पराली न जलने दें। खेतीबाड़ी सचिव काहन सिंह पन्नू ने बताया कि सूबे में खेतीबाड़ी जमीन का करीब 25 फीसदी हिस्सा एनआरआई या शहरों में रहने वाले लोगों का है। ये लोग प्रति एकड़ 40-55 हजार रुपये ठेका ले रहे हैं। इसलिए यह इनकी जिम्मेदारी है कि इनके खेतों में पराली न जले। अगर ऐसा हुआ तो सरकारी आदेश का उल्लंघन मानते हुए सीधे जमीन मालिकों पर कार्रवाई की जाएगी।
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उन्होंने जमीन मालिकों से अपील की कि ठेके की रकम कुछ कम करें और काश्तकारों को पराली का प्रबंधन खेत में करने को प्रेरित करें। गौरतलब है कि राज्य भर में पराली जलाने पर पाबंदी है। जिला मजिस्ट्रेट ने भी सीआरपीसी 144 के तहत प्रतिबंध लगाया हुआ है। पन्नू ने बताया कि सभी डिप्टी कमिश्नरों से कहा गया है कि गांव स्तर पर तैनात नोडल अफसरों को जमीन मालिकों की सूची तैयार बनाने और उनसे संपर्क करने के निर्देश दें। सभी पटवारियों को हिदायत दी गई है कि जिस जमीन में पराली जलने की घटना सामने आती है, वहां गिरदावरी में रेड एंट्री करें।

काबिलेजिक्र है कि धान की पराली जलने से मिट्टी, वातावरण और मानवीय सेहत पर पड़ते नुकसान को देखते हुए कैबिनेट ने सर्व सम्मति से प्रस्ताव पास किया था। जिसके तहत किसानों को कुदरती संसाधनों के संरक्षण के संबंध में श्री गुरु नानक देव जी के फलसफे को अपनाते हुए पराली न जलाने की अपील की गई है। श्री गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व समागम के मद्देनजर भी सरकार ने किसानों से अपील की है कि पराली न जलाएं। क्योंकि समागम में देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु शामिल होंगे।
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पराली पर झूठे निकले पंजाब सरकार के दावे

पंजाब में पराली जलाने पर रोक लगाने के लिए 22 आईएएस अधिकारियों को नियुक्ति का कोई असर दिखाई नहीं दे रहा है। खेतों में धड़ल्ले से पराली जलाने का सिलसिला शुरू हो गया है। 12 अक्तूबर तक पंजाब के विभिन्न जिलों में 706 जगह पर पराली को आग लगाई जा चुकी है। रोचक बात है कि 2018 में 12 अक्तूबर तक 435 जगह पर पराली जलाने के मामले ही रिकॉर्ड किए गए थे। इस बार सबसे ज्यादा मामले अमृतसर जिले में सामने आए हैं।

हालांकि पंजाब सरकार के अधिकारी पराली जलाने के मामलों में कमी होने के दावे जता रहे हैं, लेकिन पंजाब रिमोट सेंसिंग सेंटर के आंकड़े ही सरकार के दावों की पोल खोल रहे हैं। सैटेलाइट के माध्यम से पंजाब के चप्पे-चप्पे पर नजर रखी जा रही है। अभी तक मिले आंकड़ों के अनुसार 23 सितंबर से 12 अक्तूबर तक सूबे में 706 जगहों पर पराली जलाई जा चुकी है। इनमें 11 अक्तूबर को विभिन्न जिलों में 77 जगह पर पराली को आग लगाई जा चुकी है।

अभी तक अमृतसर में सबसे ज्यादा पराली जलाने के 25 मामले सामने आए हैं। इसके बाद पटियाला में 16 और तरनतारन में 10 मामले दर्ज किए गए हैं। 12 अक्तूबर को सूबे में 76 जगह पर पराली जलाई गई। इन दिनों में साल 2017 में पराली जलाने के 1204 मामले सामने आए थे, जबकि 2018 में यह कम होकर 435 ही रह गए थे। अब 2019 में पराली जलाने का सिलसिला फिर से तेजी पकड़ रहा है। पंजाब रिमोट सेंसिंग सेंटर ने सारा रिकॉर्ड केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड सहित जिले के सभी अधिकारियों को भेज दिया है।

जिला खेतीबाड़ी अफसर बलदेव सिंह ने बताया कि पराली जलाने वाले किसानों पर जुर्माना लगाने पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। अब अधिकारी पराली जलाने वाले किसान की शिकायत कर उसके खिलाफ मामला दर्ज करवा सकते हैं। इसके अलावा सरकार किसान को मिलने वाली सब्सिडी पर रोक लगा सकती है। अगर पराली जलाने वाला किसी सरकारी विभाग से संबंधित है, तो उसकी सर्विस बुक में इस मामले को दर्ज किया जाएगा।
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