पंजाब के स्थानीय निकाय विभाग ने मंगलवार को स्पष्ट कर दिया कि मीडिया के कुछ हिस्सों में आई यह खबर कि सूबे के शहरों में पालतू जानवर रखने पर टैक्स लगाया जा रहा है, पूरी तरह बेबुनियाद और तथ्यहीन हैं। विभाग के प्रवक्ता ने कहा कि स्थानीय निकाय विभाग की ओर से ऐसा कोई टैक्स नहीं लगाया जा रहा है। वहीं इस बारे में निकाय मंत्री नवजोत सिद्धू से पूछा गया तो उन्होने भी ऐसे किसी भी तरह का टैक्स लगाने से मना कर दिया।
प्रवक्ता ने यह भी स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया के हिस्से में चल रहे पत्रों का टैक्स लगाने से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि इन पत्रों में विभाग की ओर से हाईकोर्ट के आदेशों के अंतर्गत पंजाब म्युनिसिपल निगम और म्युनिसिपल (रजिस्ट्रेशन कंट्रोल ऑफ स्ट्रे एनिमल और कंपनसेशन टू द विकटिम ऑफ एनिमल अटैक) बाईलाज 2017 बनाने से संबंधित है।
प्रवक्ता ने बताया कि पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट की ओर से सिविल रिट पटीशन नंबर 14188 ऑफ 2017 राम कुमार बनाम पंजाब सरकार व अन्य के संबंध में पंजाब, हरियाणा और यूटी को आवारा कुत्तों/जानवरों द्वारा राहगीरों को काटे जाने से रोकने और आवारा पशुओं के काटे जाने से मृत व्यक्ति के परिवार को मुआवजा देने संबंधी नीति बनाने के लिए कहा गया था। इस प्रस्ताव के अंतर्गत कोई भी नया टैक्स लगाने संबंधी नहीं कहा गया है बल्कि लोगों की सुविधा के लिए आवारा कुत्ते/जानवर के काटे जाने के कारण मौत होने की स्थिति में मुआवजा देने का प्रस्ताव/नीति तैयार करने संबंधी पत्र जारी किया गया है।