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अब 'मेक इन पंजाब' पर फोकस, तीस लाख से कम की खरीद स्थानीय सप्लायर को मिलेगी प्राथमिकता

Tue, 10 Dec 2019 02:46 AM IST
ajay kumar अखिल तलवार, अमर उजाला, चंडीगढ़
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कैप्टन अमरिंदर सिंह (फाइल फोटो) - फोटो : ANI
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पंजाब सरकार ने अब मेक इन पंजाब पर फोकस करने का फैसला किया है ताकि सूबे की आय बढ़ाने के साथ-साथ रोजगार के ज्यादा मौके पैदा किए जा सकें। इसे लेकर पंजाब सरकार ने पब्लिक प्रोक्योरमेंट (प्रेफ्रेंस टू मेक इन पंजाब) ऑर्डर 2019 जारी किया है। अतिरिक्त मुख्य सचिव, उद्योग विन्नी महाजन ने सभी विभागों, बोर्ड व निगमों को आदेश जारी कर दिए हैं कि अब खरीद में स्थानीय मैन्युफैक्चरर या सप्लायर को ही प्राथमिकता दी जाएगी। 

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सरकार को उम्मीद है कि इससे सूबे में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को प्रोत्साहन मिलेगा। सरकार द्वारा जारी नोटिफिकेशन के मुताबिक तीस लाख या उससे कम की खरीद में सिर्फ स्थानीय सप्लायर ही हिस्सा ले सकेंगे। तीस लाख से ज्यादा की खरीद में भी स्थानीय सप्लायर को प्राथमिकता दी जाएगी। अगर कोई स्थानीय सप्लायर या मैन्युफैक्चर नहीं आता है तो सबसे कम बोली लगाने वाले को कॉन्ट्रैक्ट दिया जाएगा। एक लाख से कम की खरीद पर यह आदेश लागू नहीं होगा। सरकार ने सभी विभागों से कहा है कि अगर वे कोई आइटम इस आदेश के दायरे से बाहर रखना चाहते हैं तो तीन माह में उनकी सूची भेजें।

घोषणा पत्र गलत दिया तो प्रतिबंध
आदेश के अनुसार स्थानीय सप्लायर को टेंडर के समय एक स्व-घोषणापत्र देना होगा कि संबंधित आइटम शर्तों के मुताबिक पंजाब में ही बना है। सरकार उस घोषणा पत्र पब्लिक डोमेन में रखकर सात दिन तक उस पर एतराज लेगी। अगर इस दौरान कोई एतराज न आया तो उसे ठीक माना जाएगा। किसी का घोषणा पत्र झूठा पाया गया तो उस मैनुफैक्चरर को प्रतिबंधित कर दिया जाएगा। इसके लिए कंट्रोलर ऑफ स्टोर्स की अगुवाई में एक कमेटी बनेगी। इसमें वित्त, एक्साइज टैक्सेशन, प्रिंटिंग व स्टेशनरी के कंट्रोलर और एडिशनल कंट्रोलर, डायरेक्टर गवर्नेंस रिफॉर्म्स विभागों के एक-एक प्रतिनिधि होंगे।
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स्टैंडिंग कमेटी करेगी समीक्षा 
एक स्टैंडिंग कमेटी गठित की जाएगी। इसमें उद्योग, वित्त, सेहत, पब्लिक वर्क्स, स्कूली शिक्षा, वाटर सप्लाई एंड सैनिटेशन, स्थानीय निकाय, पंचायत व ग्रामीण विकास विभागों के प्रशासनिक सचिव और उद्योग विभाग के डायरेक्टर शामिल होंगे। यह कमेटी जरूरत पड़ने पर कभी भी और वैसे छह माह में एक बार बैठक करेगी। यह कमेटी इस आदेश के अमल की समीक्षा करेगी। आदेश लागू होने के संबंध में आने वाली शिकायतों पर फैसले लेगी।

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