मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह
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कोरोना महामारी के चलते निजी अस्पतालों की मुनाफाखोरी पर रोक लगाते हुए पंजाब सरकार ने इलाज का खर्च निर्धारित कर दिया है। इसका एलान मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कोविड के संबंध हुई समीक्षा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के बाद की इलाज से संबंधित यह दरें डॉ. केके तलवार कमेटी ने निजी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों के लिए निर्धारित की है। इसमें आइसोलेशन बेड, आईसीयू में इलाज, अस्पताल में भर्ती होने का खर्च और दाखिल होने के बाद प्रतिदिन का खर्च शामिल हैं।
साधारण बुखार जिसमें आइसोलेशन बेड, देखरेख व ऑक्सीजन की जरूरत पड़ती है तो उसके लिए मरीज के भर्ती होने के बाद प्रतिदिन का खर्च सभी निजी मेडिकल कॉलेजों/एनबीई के टीचिंग प्रोग्राम वाले एनएबीएच निजी अस्पतालों में 10,000 रुपए निर्धारित किया गया है, जबकि एनएबीएच से मान्यता प्राप्त अस्पतालों (निजी मेडिकल कॉलेजों, जिनमें पीजी/डीएनबी कोर्स नहीं हैं) के लिए 9,000 रुपए और एनएबीएच से गैर-मान्यता प्राप्त अस्पतालों के लिए 8,000 रुपए की दर निर्धारित की गई है।
इन श्रेणियों के अस्पतालों के लिए गंभीर बुखार (वेंटिलेटर की जरूरत के बिना आईसीयू) के लिए क्रमशः 15 हजार, 14 हजार और 13 हजार रुपए तक की सीमा निर्धारित की गई है, जबकि बहुत ही नाजुक स्थिति वाले मरीजों के लिए यह दरें क्रमशः 18 हजार, 16500 और 15 हजार निर्धारित की गई हैं।
सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि इन सभी दरों में पीपीई की कीमत भी शामिल है। निजी अस्पतालों को मामूली बुखार के इलाज के लिए प्रोत्साहित करते हुए डॉ. तलवार कमेटी ने ऐसे मामलों के लिए प्रतिदिन भर्ती फीस क्रमशः 6500 रुपए, 5500 रुपए और 4500 रुपए निर्धारित की है।
सरकार द्वारा यह कदम कोविड के इलाज संबंधी निजी अस्पतालों द्वारा वसूल किए जाने वाले उपचार खर्च सीमा से अधिक लिए जाने के बाद उठाया गया है। मुख्यमंत्री को निजी तौर पर इस संबंध में शिकायतें मिली थीं और उन्होंने डॉ. तलवार कमेटी और राज्य के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग को इस मामले पर ध्यान देने और निजी अस्पतालों से बातचीत करने के बाद उचित उपचार दरें निर्धारित करने के निर्देश दिए थे।