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खाने को लेकर कैप्टन की नहीं गली दाल, अब सस्ते खाने के लिए चुकाने होंगे 13 रुपये

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कैप्टन अमरिंदर सिंह
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क्या 5 रुपये की खाने की थाली में आपका पेट भर सका है। महंगाई के इस दौर में ये सवाल अब पंजाब की कैप्टन सरकार के पसीने छुड़ाने लगा है। सरकार बनने से पहले कांग्रेस ने पंजाब में पांच रुपये में खाना देने का वायदा तो कर दिया, लेकिन सरकार बनने के बाद जब कैप्टन की टीम इसका हिसाब लगाने लगी, तो जमीनी हकीकत वादे से अलग निकली।
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जब मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह और उनकी टीम ने हिसाब लगाया तो उन्हें पता चला कि 5 रुपये में ये खाना लोगों को दे पाना संभव नहीं है। इस रेट पर खाना मुहैया कराने के लिए सरकार को अपने खजाने से पैसा लगाना पड़ेगा। लेकिन फिलहाल पंजाब सरकार की वित्तीय हालत ऐसी नहीं है कि खाने पर राज्य का खजाना खर्च किया जा सके। इसके लिए सरकार ने अब इस खाने के लिए 13 रुपये वसूलने का प्लान बनाया है।

सूत्रों के मुताबिक जब राज्य सरकार ने इस योजना के खर्च पर विचार करना शुरू किया तो सामने आया कि 5 रुपये में 6 रोटियां, एक कटोरी दाल या एक कटोरी सब्जी देना संभव नहीं था। पंजाब सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि, हम सस्ता खाना पर सब्सिडी देने की हालत में नहीं थे क्योंकि इससे सरकार के ऊपर आर्थिक बोझ पड़ता, इसलिए अपने इस स्कीम को नो प्रोफिट नो लॉस के तहत शुरू करने का मन बनाया। इसके तहत एक एक बार सस्ता भोजन देने की लागत 13 रुपये पड़ रही है, हम इसी कीमत इसे जनता को मुहैया कराएंगे।
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सस्ती रोटी को लेकर 'नो प्राफिट, नो लास'

भोजन
मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव सुरेश कुमार कहते हैं 'सस्ती रोटी' के माड्यूल पर स्टडी की जा रही है। चंडीगढ़ में 10 रुपये में थाली पड़ रही है, जबकि पंजाब में इसका मूल्य करीब 13 रुपये आ रहा है। सरकार सस्ती रोटी को 'नो प्राफिट, नो लास' आधार पर लेकर आएगी। कांग्रेस ने तमिलनाडु की तर्ज पर चुनाव में सस्ती रोटी देने की घोषणा की थी। चुनाव में इस घोषणा को लोकप्रियता भी मिली थी। लेकिन चुनाव के बाद सरकार बनने पर ये पहली बार है जब कैप्टन सरकार तय वादे से पीछे हटती दिखाई दे रही है।  हालांकि सरकार अपने वादे को पूरा तो करना चाहती है लेकिन इसे पूरा करने में उसे काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा रहा है। 
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