आखिरकार पंजाब में ट्रक यूनियनों का दौर खत्म हो गया। राज्य सरकार ने पंजाब गुड्स कैरेजेज 2017 का नोटिफिकेशन जारी कर दिया। अब वस्तुओं की ढुलाई सुचारु बनाने के लिए सरकार समय-समय पर न्यूनतम व अधिकतम रेट निर्धारित करेगी। ये दरें नम और शुष्क भार आधारित होंगी। पशुओं की ढुलाई के लिए भी दरें तय की जाएंगी। इसके लिए तेल की कीमतें, वेतन, खर्च और अन्य संबंधित कारकों को ध्यान में रखा जाएगा। इस तरह तय किए रेट सभी माल गाड़ियों पर लागू होंगे।
पंजाब में इकरारनामा और माल लोड करने वालों (चाहे वह पंजाब में या बाहर माल भेजते हों) पर ये रेट लागू होंगे। इन नियमों को पहले से जारी परमिट और भविष्य में जारी होने वाले परमिट की शर्तों का हिस्सा माना जाएगा। सरकार का दावा है कि इससे औद्योगिक व बुनियादी ढांचे में निवेश को प्रोत्साहित करने को अनुकूल वातावरण मुहैया करवाने में मदद मिलेगी। नोटिफिकेशन के मुताबिक ऑपरेटर और माल गाड़ियों के परमिट धारक या उनके संगठन कोई गुट नहीं बना सकेंगे।
न ही वह दूसरे ऑपरेटर या परमिट धारक को उसके साथ सहभागी बनने को मजबूर कर सकेगा। अगर किसी ऑपरेटर को परमिट के नियमों के तहत किसी इलाके में माल ले जाने की अनुमति दी गई है तो कोई दूसरा ऑपरेटर उसे रोक नहीं सकेगा। इसका उल्लंघन करने पर परमिट रद्द किया जा सकता है। पीड़ित ऑपरेटर नामजद अफसर को शिकायत देंगे जो आगे की कार्रवाई के लिए योग्य अधिकारी को भेजेगा।
परमिट रद्द करने केलिए धारा 86 के तहत कार्रवाई की जाएगी। एक्ट में जुर्माने की भी व्यवस्था की गई है। रुकावट डालने पर ऑपरेटर स्थानीय पुलिस को शिकायत दे सकते हैं, जो उसकी सुरक्षा यकीनी बनाएगी।
कब्जे की जंग को लेकर होते थे खूनी संघर्ष
पंजाब में ट्रक यूनियनों पर काबिज होने के लिए आए दिन खूनी संघर्ष होते थे। जिस पार्टी की सरकार बनती थी, ट्रक यूनियनों पर भी उनके लोगों का कब्जा हो जाता था। औद्योगिक नीति बनाते समय उद्यमियों ने सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह से यह मांग की थी कि ट्रक यूनियनों का एकाधिकार खत्म किया जाए। इसके कारण उन्हें काम करने में बहुत समस्या आ रही है। इसके बाद सीएम ने ट्रक यूनियन खत्म करने का फैसला किया था।