श्री गुरुग्रंथ साहिब की बेअदबी मामले में राम रहीम की भूमिका जांचने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार ने सोमवार को हाईकोर्ट में सीबीआई से जांच वापस लेने के लिए जारी नोटिफिकेशन की कॉपी सौंपी। पंजाब सरकार ने बताया कि अब जांच एसआईटी को सौंपी गई है और जांच जारी है। हाईकोर्ट ने सरकार के जवाब को रिकॉर्ड में लेकर सुनवाई स्थगित कर दी।
बठिंडा के भूपिंदर सिंह गोरा ने एडवोकेट रवनीत जोशी के जरिये हाईकोर्ट में याचिका दायर कर बताया था कि साध्वी रेप मामले में राम रहीम को दोषी करार दिया जा चुका है। छत्रपति और रणजीत सिंह इन दोनों की हत्या के पीछे भी डेरा मुखी पर आरोप हैं। इसके अलावा डेरे में साधुओं को नपुंसक बनाए जाने के मामले में भी डेरा मुखी आरोपी है। अब बेअदबी मामले में भी डेरे के ही लोगों का नाम आया है, बावजूद इसके इस मामले में जांच ही नहीं की जा रही है।
बुर्ज जवाहर सिंह वाला से गुरुग्रंथ साहिब की चोरी हुई थी और इसके बाद कुछ पोस्टर मिले थे। इसमें सिखों, गुरुओं और संतों के बारे में आपत्तिजनक शब्द लिखे थे और यह भी लिखा था कि डेरा मुखी की फिल्म रिलीज होने से रोकी गई तो गुरुग्रंथ साहिब की बेअदबी कर दी जाएगी। इसके बाद बरगाड़ी में गुरुग्रंथ साहिब की बेअदबी का मामला सामने आया था।
पुलिस ने इन सभी मामलों में एफआईआर दर्ज की थी लेकिन डेरा मुखी का नाम होने के कारण जांच सही से नहीं हो पाई। हाईकोर्ट को बताया गया कि बेअदबी मामले की जांच कर रहे जस्टिस रंजीत सिंह आयोग ने भी इस मामले की जांच में पाया कि जब डेरा समर्थकों को जांच के लिए बुलाया जाता तो वे प्रदर्शन करने लगते। रिपोर्ट में कहा गया कि कैसे एक व्यक्ति ने दो राज्यों की कानून व्यवस्था को अपने हाथ में ले सकता है। डेरा समर्थकों की इन्ही हरकतों के कारण पुलिस जांच नहीं कर पाई। याचिकाकर्ता ने कहा कि जब इस मामले में डेरा समर्थकों का नाम सामने आ रहा है तो क्यों नहीं उनकी जांच की जा रही है।