पंजाब में विधानसभा की चार सीटों पर उपचुनाव का बिगुल बज गया है, जिसके साथ ही इन सीटों पर आदर्श चुनाव आचार संहिता भी लागू हो गई है। चुनाव की घोषणा के साथ ही प्रदेश की चारों प्रमुख पार्टियों ने तैयारी शुरू कर दी है। साथ ही टिकट के दावेदार नेता भी जमीनी स्तर पर सक्रिय हो गए हैं। यह उपचुनाव राज्य की चारों प्रमुख पार्टियों के लिए अहम होने वाला है।
लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने अच्छा प्रदर्शन किया था और 13 सीटों में से पार्टी ने सात पर जीत दर्ज की थी और राज्य में आम आदमी पार्टी की सरकार होने के बावजूद यह उपलब्धि हासिल की थी। आप के हाथ लोकसभा चुनाव में 3 सीटें लगी थीं, जबकि शिअद सिर्फ एक सीट पर जीत दर्ज कर सका था। हालांकि इसके बाद जालंधर उपचुनाव में आम आदमी पार्टी जीत दर्ज करने में सफल रही थी और मोहिंदर भगत यहां भारी मतों से जीतकर विधानसभा पहुंचे थे, जिसके बाद पार्टी ने उनको मंत्री पद भी सौंप दिया था। अगर पिछले तीन चुनावों की बात की जाए तो गिद्दड़बाहा से कांग्रेस लगातार जीत दर्ज करती आई है।
वर्ष 2012 से लगातार कांग्रेस प्रधान अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग यहां से जीतते आए हैं। उनके लोकसभा में निर्वाचित होने के बाद ही यह सीट खाली हुई है। पिछली तीन जीतों से कांग्रेस के हौसले बुलंद हैं, लेकिन अब कांग्रेस की राह आसान नहीं है क्योंकि अब इस सीट से कांग्रेस के सामने एक मजबूत चेहरे को उतारने की चुनौती है। हालांकि वड़िंग अपनी पत्नी अमृता वड़िंग को यहां चुनाव मैदान में उतारने का प्रयास कर रहे हैं, जबकि भाजपा मनप्रीत बादल पर दांव खेल सकती है, क्योंकि पिछले यह सीट खाली होने के बाद से ही वह यहां सक्रिय हो गए हैं।
यही स्थिति डेरा बाबा नानक सीट की भी है। यहां वर्ष 2012 से सुखजिंदर सिंह रंधावा कांग्रेस के लिए जीत दर्ज करते रहे हैं, लेकिन अब वह खुद लोकसभा में एंट्री कर चुके हैं, इसलिए कांग्रेस को यहां अब दूसरे चेहरे की तलाश करनी होगी।
अगर बात चब्बेवाल विधानसभा सीट की बात करें, तो यहां वर्ष 2012 में तो शिअद के सोहन सिंह ठंडल जीत दर्ज करके विधानसभा पहुंचे थे, लेकिन उसके बाद वर्ष 2017 व 2022 विधानसभा चुनाव में डॉ. राजकुमार चब्बेवाल ने जीत दर्ज करने में सफल रहे थे। वह तब कांग्रेस में थे, लेकिन लोकसभा चुनाव से पहले आप में शामिल हो गए थे और होशियारपुर से सांसद चुने गए थे। यहां कांग्रेस उनका विकल्प तलाशने का प्रयास कर रही है, जबकि आप से हरमिंदर सिंह संधू दोबारा दावेदारी पेश कर सकते हैं। 2022 विधानसभा चुनाव में वह हार गए थे। चब्बवाल यहां से अपने बेटे की दावेदार भी पेश कर रहे हैं।
इसके अलावा बरनाला विधानसभा सीट पर वर्ष 2007 से 2017 तक कांग्रेस काबिज रही है। केवल सिंह ढिल्लों यहां से जीत दर्ज करते रहे हैं, लेकिन वर्ष 2017 में गुरमीत सिंह मीत हेयर ने यहां से जीत दर्ज करके आप की झोली में यह सीट डाल दी और 2022 विधानसभा चुनाव में भी अपनी जीत जारी रखी। मीत हेयर आप सरकार में मंत्री बने और फिर वह संगरूर सीट से लोकसभा चुनाव में जीत दर्ज करने में सफल रहे। अब यहां आप अपनी जीत बरकरार रखने के लिए मैदान में उतरेगी, जबकि कांग्रेस दोबारा इस सीट पर काबिज होने का प्रयास करेगी। यहां वर्ष 2002 में शिअद से मलकीत सिंह कीतू ने जीत दर्ज की थी, इसलिए शिअद भी चुनाव में पूरी ताकत के साथ उतरने का प्रयास करेगा।
पिछले नतीजों से कांग्रेस व आप दोनों के ही हौसले बुलंद हैं, लेकिन उपचुनाव में मतदाता ज्यादातर सत्तापक्ष के हक में ही फैसला सुनाते रहे हैं, जो कांग्रेस के लिए चिंता का विषय है।