पंजाब सरकार ने जमानत याचिका को खारिज करने के लिए एक अलग याचिका दायर की है। इसमें पंजाब सरकार के पब्लिक प्रॉसिक्यूटर सरतेज नरूला, जिला अटॉर्नी संजीव बतरा और एसआईटी ने अपना पक्ष अलग से रखा। उनका आरोप था कि सुमेध सैनी ने पहले दी जमानत की हिदायतों के विपरीत गवाहों को धमकाया। एक पूर्व थानेदार अनोख सिंह ने डर के मारे सरकारी गवाह तक बनने से मना कर दिया था। ऐसे में उसे जमानत नहीं दी जानी चाहिए।
सैनी के खिलाफ एक और व्यक्ति बना सरकारी गवाह
मिली जानकारी के मुताबिक पूर्व डीजीपी सैनी के खिलाफ एक और सरकारी गवाह बन गया है। चंडीगढ़ के राजेश राजा नाम के व्यक्ति ने अदालत में आईपीसी की धारा-164 के तहत बयान दर्ज करवाए हैं। व्यक्ति ने अदालत को बताया कि 1991 में वह छोटी-मोटी लड़ाई में चंडीगढ़ के सेक्टर-22 की चौकी में बंद था। इसके बाद थानेदार जागीर सिंह ने उसे सेक्टर-17 के थाने में शिफ्ट कर दिया था। वहां चौकी में पर एक सिख युवक पड़ा था।
इसी बीच रात को 10-11 पुलिस वाले आए और उस युवक को दूसरे कमरे में ले गए। जहां पर उसके साथ अत्याचार किए गए थे और उसके चिल्लाने की आवाज सुनवाई दे रही थी। इसके बाद वह उसे दोबारा उसके कमरे में छोड़ गए थे। इस दौरान युवक की हालत काफी खराब थी। हालांकि मेरे पूछने पर उसने पूरी बात बताई थी। राजा ने बताया कि उसने सीबीआई को भी सैनी के खिलाफ बयान दर्ज करवाए थे और सीबीआई ने अपनी जांच में उसे बुलाया भी था।