आढ़ती मनोज कुमार मोंगा का कहना है कि ज्यादातर किसान जिन आढ़तियों से एडवांस पेमेंट लेते हैं, उन्हें फसल बेच देते हैं। जब आढ़ती के पास पेमेंट पहुंचती है तो आढ़ती अपनी उधारी काटकर बाकी धनराशि किसान को दे देता है। मोंगा ने कहा कि जमींदार सीधी पेमेंट लेना चाहते हैं तो ले भी सकते हैं। यदि आढ़ती के जरिए लेनी है वे भी ले सकते हैं।
मोंगा ने कहा कि प्रदेश सरकार आढ़ती के खाते में पेमेंट डालने को तैयार है लेकिन केंद्र सरकार ,क्योंकि किसान की सीसीएल लिमिट केंद्र सरकार की तरफ से बनती है। मंडी में काम करने वाले मजदूर उनके अधीन हैं। जैसे वो कहेंगे वैसे ही करेंगे। मंडी में गेहूं आने वाला है और खरीद शुरू हो चुकी है।
मुक्तसर मंडी में न साफ-सफाई, न पीने का पानी
किसान आंदोलन, पिछले दिनों हुई बारिश और आढ़तियों की हड़ताल के चलते इस बार मंडियों में गेहूं की आवक देरी से शुरू हुई है। रविवार तक जहां अनाज मंडी में एक-दो किसान ही पहुंचे थे। वहीं सोमवार को मंडी में गेहूं की आवक शुरू होती नजर आई। मंडी में न तो साफ-सफाई का प्रबंध है और न ही पीने के पानी की कोई व्यवस्था है।
कोविड-19 के चलते सैनिटाइजर मशीन लगी तो हैं लेकिन वो भी खराब व खाली हैं। ऊपर से लावारिस पशु किसानों के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द बने हैं। यही नहीं एक अलग समस्या यह है कि मंडी में बाहरी राज्यों से आए अनेक ट्रक खड़े हैं जो जगह घेरे हुए हैं।
गांव संगूधौण के किसान रेशम सिंह ने बताया कि वो दो दिन पहले मंडी में गेहूं लेकर पहुंचे हैं। न तो सफाई व्यवस्था का कोई प्रबंध है न ही पीने के पानी का। सबसे बड़ी गंभीर समस्या लावारिस पशु हैं जो फसल में मुंह मार रहे हैं। पिछली रात भी उन्होंने जागकर काटी। मंडी में शेड के नीचे सफाई न होने से उन्हें अपनी फसल धूप में खुले आसमान के नीचे डालनी पड़ी। मार्केट कमेटी के सचिव बलकरन सिंह का कहना था कि साफ-सफाई करवाई जा रही है। सैनिटाइजर मशीन ठीक करवा दी गई हैं।