पंजाब विधानसभा के चुनाव में प्रयोग हुई इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए दाखिल आम आदमी पार्टी की याचिका का पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने निपटारा कर दिया है। मामले में हाईकोर्ट ने केंद्रीय चुनाव आयोग तथा पंजाब राज्य चुनाव आयोग को निर्देश दिए हैं कि 11 मार्च तक जब तक मतगणना नहीं हो जाती, इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) की सुरक्षा सुनिश्चित हो।
आम आदमी पार्टी (पंजाब) ने पार्टी के सचिव गुलशन छाबड़ा के जरिए हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा है कि उन्हें चुनाव प्रक्रिया पर अभी कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन ईवीएम की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर उन्हें संदेह है। राज्य में विधानसभा के चुनाव के बाद जहां भी ईवीएम राखी गयी हैं, वहां सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध नहीं किये गए हैं।
तय प्रावधानों के तहत इन ईवीएम की सुरक्षा के लिए जो तीन स्तरीय सुरक्षा के प्रबंध किये जाने चाहिए, वह कई जगहों पर नजर नहीं आ रहे। ऐसे में इन मशीनों के साथ छेड़छाड़ की जा सकती है। वैसे भी चुनाव और मतगणना के बीच 35 दिनों का एक बड़ा अंतर हैं, ऐसे में एक महीने से अधिक समय तक इन ईवीएम की सुरक्षा में कोई चूक नहीं होनी चाहिए। अगर ऐसा हुआ तो यह लोकतंत्र के लिए बेहद घातक है।
याची ने जालंधर विधानसभा क्षेत्र का हवाला देते हुए बताया कि चुनावों के बाद से पटवार खाना की ईमारत में ईवीएम रखी गई है। इसके बिलकुल पास एक स्कूल और अन्य इमारत है, जिसमें आराम से कोई भी प्रवेश कर सकता है। ऐसा ही हाल फिलौर, शाहकोट, जालंधर वेस्ट, तरनतारन में भी है। ऐसे में ईवीएम की सुरक्षा के लिए पर्याप्त बंदोबस्त होने चाहिए। हाईकोर्ट ने याचिका का निपटारा करते हुए आयोग को निर्देश दिए हैं कि स्ट्रांग रूम्स जहां ईवीएम रखी गई हैं, उनकी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करें और याचिकाकर्ता ने सुरक्षा के लिए जो भी सुझाव दिए हैं उन पर चुनाव आयोग गौर करे।