केंद्र सरकार द्वारा जारी पहले चरण की बीस स्मार्ट सिटी में लुधियाना को भी जगह मिल गई है, लेकिन शहर को स्मार्ट बनाना इतना आसान नहीं है। औद्योगिक नगरी को स्मार्ट बनाने के लिए नगर निगम को दिक्कतों के पहाड़ हटाने होंगे। शहर में प्रदूषण, कमजोर कचरा प्रबंधन, ट्रैफिक, बुड्ढा नाला, पानी, सीवरेज, बरसाती पानी की निकासी के इंतजाम की कमी, खस्ताहाल सड़क और अवैध कब्जे जैसी दिक्कतों का समाधान करना होगा। इसके लिए सटीक रणनीति बनाने की जरूरत है।
प्रदूषण से मुक्ति
लुधियाना को प्रदूषण मुक्त बनाना बड़ी चुनौती होगा। स्मार्ट सिटी बनाने के लिए लोगों से ली गई राय में 85 फीसदी लोगों ने प्रदूषण को लेकर सबसे ज्यादा चिंता जताई थी। लोगों के सुझावों के तहत शहर में सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने की वकालत की गई। इसके अलावा लोगों ने शहर में साइकिलिंग और ई रिक्शा को बढ़ावा देने की राय दी। साथ ही पर्यावरण फ्रेंडली ट्रांसपोर्ट को आगे लाने की मांग की गई।
बुड्ढा नाला-सबसे बड़ा चैलेंज
लुधियाना के 14 किलोमीटर इलाके से गुजर रहे बुड्ढे नाले को साफ करना सबसे बड़ी चुनौती होगा। अब तक बुड्ढे नाले की दशा सुधारने के लिए केंद्र, राज्य सरकार और निगम ने करोड़ों रुपये खर्च किए हैं, लेकिन नाले की स्थिति जस की तस बनी हुई है। नाले के आसपास लाखों की संख्या में लोग बसते हैं, उनकी सेहत पर भी इसका बुरा असर हो रहा है।
कचरा प्रबंधन
लुधियाना में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के नाम पर निगम ने निजी कंपनी को कूड़े की लिफ्टिंग का काम दे रखा है। शहर से रोजाना करीब 1200 टन कूड़ा निकलता है, लेकिन कंपनी एक हजार टन की ही लिफ्टिंग कर पाती है। 200 टन कचरा सड़कों पर ही बिखरा रहता है। अब तक शहर में सॉलिड वेस्ट की ट्रीटमेंट का कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किया जा सका है।
पानी और सीवरेज की उपलब्धता
स्मार्ट सिटी योजना के तहत शहर के सभी लोगों को शुद्ध पानी और सीवरेज मुहैया कराना बड़ी चुनौती होगा। इस वक्त निगम 700 से अधिक ट्यूूबवेल के मार्फत पानी की आपूर्ति कर रहा है। शहर के बड़े हिस्से में पानी उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। यही हाल सीवरेज का भी है। बरसाती पानी की निकासी के लिए भी शहर में पुख्ता इंतजाम नहीं हैं। ऐसे में बरसात का पानी सड़कों पर जमा हो जाता है। इसके अलावा टूटी सड़कें और ट्रैफिक को सुचारू करना भी बड़ी चुनौती होगा।
शहरवासियों में खुशी का माहौल
केंद्र सरकार की ओर से जारी स्मार्ट सिटी की पहली लिस्ट में लुधियाना को स्थान मिल गया, इससे लुधियानवियों में खुशी का आलम है। लोगों को उम्मीद है कि अब उनके शहर की दशा और दिशा में सुधार आएगा। स्मार्ट सिटी की लिस्ट में शामिल होने के बाद निगम अधिकारियों के हौसले भी बुलंद हैं।
अधिकारियों के मुताबिक इस प्रोजेक्ट के तहत मार्च तक 200 करोड़ की पहली किश्त जारी हो सकती है। सौ शहरों की लिस्ट में लुधियाना के अलावा अमृतसर पटियाला और जालंधर भी रेस में शामिल थे, लेकिन बाजी लुधियाना ने ही मारी। अधिकारियों का कहना है कि पहली किश्त की अदायगी के साथ ही स्मार्ट सिटी बनाने के लिए सलाहकार कंपनी डीपीआर तैयार करेगी। इसके बाद टेंडरों के जरिए शहर को स्मार्ट बनाने का अभियान शुरू हो जाएगा।
योजनाओं का पूरा खाका तैयार
निगम कमिश्नर जीके सिंह का कहना है कि स्मार्ट सिटी के तहत घुमार मंडी और आसपास के इलाकों को एरिया डेवलपमेंट के जरिए विकसित किया जाएगा। इसके अलावा शहर में वाहन मुक्त जोन, पैदल एवं बाइक फ्रेंडली सड़कें और गलियां बनाई जाएंगी। साइकिल के लिए विशेष ट्रैक बनाए जाएंगे। शहर में स्पीड लिमिट 25 किलोमीटर प्रति घंटा, मल्टी लेवल और मल्टी यूज कार पार्किंग, छतों पर सोलर पैनल, होर्डिंग मुक्त शहर, स्मार्ट सार्वजनिक शौचालय, सॉलिड वेस्ट प्रबंधन, भूमिगत बिजली के तार, स्मार्ट सिटी लाइट और बारिश के पानी की संभाल समेत कई काम कराए जाएंगे। शहर को स्मार्ट बनाने के लिए स्पेशल पर्पज व्हीकल (एसपीवी) स्थापित किया जाएगा।
सर्वे में एक लाख लोगों ने दी थी राय
सौ स्मार्ट सिटी की लिस्ट में आने के बाद एक निजी कंपनी ने लुधियाना में सर्वे करके एक लाख से अधिक लोगों से राय ली थी। 4100 लोगों ने सरकारी वेबसाइट पर रिस्पांस किया। 2200 लोगों ने विजन स्टेटमेंट के जरिए रिस्पांस किया और 1844 लोगों ने वोट किया था। इसके अलावा भी लोगों ने अपने अपने तरीके से अपनी राय प्रशासन के सामने रखी थी।
चुनाव में लुधियाना को बेहतरीन शहर बनाने का वादा पूरा किया गया है। अब सभी को मिलकर शहर को स्मार्ट बनाना है। शहर में अब विकास की रफ्तार में तेजी आएगी और योजनाबद्ध तरीके से शहर के ढांचे को नया रूप दिया जा सकेगा।
- रवनीत सिंह बिट्टू, सांसद, लुधियाना
निगम की ओर से कराए सर्वे में लुधियानवियों ने बढ़ चढ़ कर सुझाव दिए थे। अब शहर को स्मार्ट बनाने के लिए सभी का सहयोग लिया जाएगा।
- हरचरण सिंह गोहलवड़िया, मेयर, लुधियाना