पंजाब पुलिस के प्रमुख सुरेश अरोड़ा ने कहा है कि कुछ लोगों द्वारा अपने स्वार्थों के लिए उन्हें और अन्य उच्चाधिकारियों के खिलाफ निराधार और दुर्भावना से शुरू की गई मुहिम के जरिए पुलिस का मनोबल गिराने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि वे इस साजिश में शामिल व्यक्तियों के खिलाफ हरसंभव कानूनी रास्ता अपनाएंगे। पत्रकारों के सवालों के जवाब देते हुए अरोड़ा ने अपनी ईमानदारी पर पिछले कुछ हफ्तों के दौरान किए गए दुष्प्रचार पर चुप्पी तोड़ते हुए कहा कि उन्होंने अपने 36 साल के कार्यकाल के दौरान भ्रष्ट और अपराध गतिविधियों में शामिल किसी भी पुलिस अधिकारी का कभी समर्थन नहीं किया।
हाईकोर्ट में एक खास मामले पर उन पर लगे आरोपों के संबंध में उन्होंने कोई भी टिप्पणी करने से इंकार करते हुए कहा कि उन्हें कुछ मामलों पर इसलिए बोलना पड़ रहा है क्योंकि उनके किरदार और सरकारी कार्य व्यवहार पर उंगली उठाने से पुलिस के मनोबल पर चोट पहुंची है। डीजीपी ने कहा कि कुछ लोगों ने अपने निजी स्वार्थ और दुर्भावना से मेरी 35 साल की सेवाओं और भरोसे पर सवाल उठाए हैं। मैं उन लोगों को बताना चाहता हूं कि अपने नाम और इज्जत, जो पुलिस फोर्स से जुड़े हुए हैं, की रक्षा के लिए वे सब कुछ करेंगे जो आवश्यक होगा और मैं इस संबंध में कानूनी कार्रवाई के लिए हरसंभव तरीके अपनाएंगे।
अरोड़ा ने कहा कि पंजाब के सरहदी सूबा होने और पड़ोसी देश के हमेशा गड़बड़ी की फिराक में रहने के कारण ऐसे बेबुनियाद आरोप उभारने ओर भी गंभीर मामला बन जाता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सूबे की पुलिस का अक्स बिल्कुल बेदाग है और पंजाब सरकार की तरफ से पुलिस के सीनियर अधिकारियों की मेरिट और ईमानदारी के सवाल पर समझौता नहीं किया जा सकता। उन्होंने अपने बेदाग रिकार्ड का हवाला देते हुए कहा कि उन्होंने आपरेशन ब्लैक थंडर समेत पंजाब के काले दौर के दौरान एसएसपी के रूप में कई जिलों में सेवाएं निभाई हैं।
अरोड़ा ने आगे कहा कि वे बाकायदा एक विधिवत प्रक्रिया के तहत ही डीजीपी के ओहदे पर पहुंचे हैं। उन्होंने कहा कि क्योंकि कोई भी कानून से ऊपर नहीं है, तो निराधार आरोपों से अधिकारियों की सुरक्षा अत्यावश्यक है। उन्होंने कहा कि देश और विदेशों में बसे आतंकवादी संगठनों से अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा को दरपेश खतरों के मद्देनजर अधिकारी अपनी जिम्मेदारी निभाने से हिचकिचा रहे हैं।
राजजीत में चहेता नहीं, दोषी हुआ तो भुगतने होंगे नतीजे
मोगा के पूर्व एसएसपी राजजीत सिंह के बारे में पूछे जाने पर अरोड़ा ने कहा कि उन्होंने कभी भी किसी अधिकारी के साथ काम नहीं किया और कहा कि जहां तक 2013 से संबंधित मुद्दा है, वे उस समय डीजीपी के पद पर नहीं थे। उन्होंने इस बात से भी इंकार किया कि राजजीच उनका चहेता था और साफ किया कि अगर वह किसी भी अपराधी कार्रवाई में लिप्त पाया जाता है तो कानून के अनुसार नतीजे भुगतेगा। उन्होंने यह भी साफ किया कि कैप्टन अमरिंदर सिंह के निर्देशानुसार नशे और घिनौने अपराधों के खिलाफ किसी भी कीमत पर समझौता नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि 80 हजार की नफरी वाली मजबूत फोर्स में कोई भी काली भेड़ नहीं है।