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गुटबाजी खत्म करने को कांग्रेस चलेगी ये बह्मास्त्र

Fri, 21 Mar 2014 05:27 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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कांग्रेस में चल रही गुटबाजी को खत्म करने के लिए चुनाव से पहले कई लोगों को पदों से नवाजा जाएगा। प्रदेश कार्यकारिणी के खिलाफ बगावत के बाद बनाई गई ग्रीवांसेज कमेटी ने अपनी रिपोर्ट हाईकमान को सौंप दी है।
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जिसमें कई मौजूदा पदाधिकारियों को प्रमोट करने की सिफारिश की गई है। साथ ही कई नए लोगों को कार्यकारिणी में शामिल करने का प्रस्ताव रखा है।

नए पदाधिकारियों का ऐलान संभव

माना जा रहा है कि टिकटों के ऐलान के तुरंत बाद हाईकमान इस पर फैसला करेगा। दो-तीन दिन के अंदर ही नए पदाधिकारियों का ऐलान संभव है।

प्रदेश प्रधान प्रताप बाजवा ने दिसंबर-13 में अपनी जंबो कार्यकारिणी का ऐलान किया था। उसके साथ ही बगावत शुरू हो गई थी। बड़ी संख्या में लोगों ने इस्तीफे दिए।

जिसके बाद मोहिंदर सिंह केपी की अगुवाई में ग्रीवांसेज कमेटी गठित की गई। जिसने पहले दिल्ली में, फिर जिलों में जाकर नाराज लोगों का पक्ष सुना। उसके बाद अपनी रिपोर्ट पंजाब प्रभारी शकील अहमद को दी है।

लोकसभा हलका वार रिपोर्ट तैयार

चुनावों के मद्देनजर कमेटी ने लोकसभा हलका वार अपनी रिपोर्ट तैयार की है। जिसमें इस बात का ध्यान रखा गया है कि जिस हलके में ज्यादा नाराजगी है, वहां के ज्यादा लोगों को एडजस्ट करके राजी कर लिया जाए।

सूत्रों के मुताबिक कमेटी ने चालीस से ज्यादा मौजूदा पदाधिकारियों को प्रमोट करने की सिफारिश की है। वहीं, पचास से ज्यादा नए लोगों को पद देने को कहा है। दो जिला प्रधानों को बदलने की भी सिफारिश की गई है।

महिला कांग्रेस को भी कमेटी में बीस पद देने की सिफारिश की गई है। कमेटी की सदस्य मालती थापर ने कहा कि रिपोर्ट शकील अहमद को सौंपी गई है, जल्द ही इस पर फैसला हो जाएगा।

पहले ही बनी थी जंबो कार्यकारिणी

प्रताप बाजवा ने पहले ही जंबो कार्यकारिणी बनाई थी। जिसमें 14 उपप्रधान, 35 महासचिव, 61 सचिव शामिल थे। 148 लोगों को कार्यकारिणी का मेंबर बनाया गया था। जबकि, 34 सीनियर नेताओं को परमानेंट इनवाइटी बनाया गया था, जिनमें कैप्टन अमरिंदर सिंह भी शामिल थे। इसके साथ ही 27 जिला प्रधान भी नियुक्त किए गए थे।
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खैहरा ने जेटली को दी बहस की चुनौती

कांग्रेस प्रवक्ता सुखपाल खैहरा ने अमृतसर से भाजपा उम्मीदवार अरुण जेटली को पंजाब के मुद्दों पर बहस की चुनौती दी है।

खैहरा ने सवाल किया है कि कच्छ के पचास हजार सिख किसानों को उजाड़ने के मामले में मोदी सरकार ने एसएलपी वापस क्यों नहीं ली। जबकि भाजपा के प्रधानमंत्री कैंडिडेट नरेंद्र मोदी इसका आश्वासन दे चुके हैं।

अकालियों ने संविधान में संशोधन कर सिख को अलग धर्म मानने की मांग की है। क्या मोदी इसके पक्ष में हैं या समझते हैं कि सिख, हिंदू धर्म का ही हिस्सा है। चंडीगढ़ को पंजाब को देने के मामले में जेटली की क्या राय है। खैहरा ने नदियों केपानी के वितरण पर भी जेटली की राय पूछी है। खैहरा ने ऑपरेशन ब्लू स्टार सहित कई मुद्दों पर जेटली से सवाल किए हैं। जिनमें आनंदपुर साहिब प्रस्ताव, सेना में सिखों का कोटा बढ़ाना, चार राज्यों में पंजाबी को दूसरी भाषा का दर्जा देना शामिल है। खैहरा ने चुनौती दी कि जेटली इन मुद्दों पर खुली बहस करें। साथ ही वादा करें कि सांसद बनने पर इन्हें पूरा करेंगे।
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