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पंजाब कांग्रेस की अंतर्कलह : जाखड़ की प्रधानी पर संकट, परगट पर भी गिरेगी गाज

Mon, 14 Jun 2021 01:29 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़

सार

  • तीन सदस्यीय कमेटी की राहुल गांधी से मुलाकात, सख्त फैसले की उम्मीद
  •  मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के खिलाफ बयानबाजी को लेकर होगी कार्रवाई
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अमरिंदर सिंह - फोटो : social media
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विस्तार
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मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के खिलाफ हुई बयानबाजी को लेकर आलाकमान सख्त है। कांग्रेस आलाकमान ने जाखड़ की प्रधानी छीनने का मन बना लिया है। जल्द ही इस कार्रवाई की औपचारिक घोषणा कर दी जाएगी। विधायक परगट सिंह भी इस कार्रवाई की जद में आएंगे, क्योंकि उन्होंने भी बयानबाजी को लेकर कोई भी कसर बाकी नहीं रखी।

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पंजाब कांग्रेस की अंतर्कलह को लेकर पार्टी आलाकमान को तीन सदस्यीय कमेटी की तरफ से रिपोर्ट सौंप दी गई है। रिपोर्ट की फाइल सोनिया गांधी के पास है और वह कमेटी के सदस्यों से इस मामले में विचार-विमर्श भी कर चुकी हैं। राहुल गांधी भी कमेटी सदस्यों के साथ संपर्क बनाए हुए हैं और हर पहलू पर चर्चा कर रहे हैं। पंजाब प्रभारी हरीश रावत भी संगठन के सभी पहलुओं की जानकारी राहुल तक पहुंचा रहे हैं। 

रविवार को राहुल गांधी से कमेटी के तीनों सदस्यों मल्लिकार्जुन खड़गे, पंजाब प्रभारी हरीश रावत और जेपी अग्रवाल ने मुलाकात की। इस दौरान सदस्यों को साफ संकेत दिए कि पंजाब में पार्टी अनुशासन तोड़ने वाले किसी भी नेता को बख्शा नहीं जाएगा। इस सियासी मुलाकात में यह तय हो गया है कि पार्टी की अंतर्कलह में पंजाब के प्रधान सुनील जाखड़ एक बार फिर अपनी कुर्सी गंवाएंगे।
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कांग्रेस प्रधान सुनील जाखड़ के शुक्रवार को दिए गए बयान के बाद इस बात की पुष्टि पहले ही हो चुकी है। उन्होंने अपने बयान में कहा था कि यदि उनके हटने से पंजाब में कांग्रेस मजबूत होती है तो वह इस बलिदान के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। आलाकमान की इस कार्रवाई की जद में पार्टी विधायक परगट सिंह भी आएंगे। उनके खिलाफ भी आलाकमान मुख्यमंत्री के खिलाफ बयानबाजी पर कोई बड़ा फैसला ले सकता है।

जाखड़ को 2017 में गंवानी पड़ी थी नेता प्रतिपक्ष का पद
2017 में मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और प्रताप सिंह बाजवा की खींचतान में भी सुनील जाखड़ को विपक्ष के नेता की कुर्सी गंवानी पड़ी थी। उस समय पार्टी की कलह को खत्म करने के लिए प्रताप सिंह बाजवा को प्रधान पद से हटाकर कैप्टन को प्रदेश अध्यक्ष बना दिया गया था। इस मुहिम में सुनील जाखड़ को नेता प्रतिपक्ष का पद गंवाना पड़ा था।

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