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कैप्टन अमरिंदर सिंह ने मैरिज पैलेस, होटल, बार और रेस्तरां संचालकों को दी बड़ी राहत

Wed, 30 Sep 2020 05:13 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

  • बार, मैरिज पैलेस, होटल और रेस्टोरेंट की वार्षिक लाइसेंस फीस माफ
  • मंत्रिमंडल में लिया गया फैसला, अनुमानित तिमाही फीस भी नहीं लेगी सरकार
  • सरकार के इस फैसले से खजाने पर पड़ेगा 1705.50 लाख रुपये का वित्तीय बोझ
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कैप्टन अमरिंदर सिंह (फाइल फोटो) - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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पंजाब सरकार ने मंत्रिमंडल में सूबे के बार, मैरिज पैलेस, होटल और रेस्टोरेंट संचालकों को बड़ी राहत दी है। मंत्रिमंडल ने इनकी वार्षिक लाइसेंस फीस और अनुमानित फीस माफ करने का महत्वपूर्ण फैसला लिया है। सरकार के इस फैसले से राज्य के खजाने पर वार्षिक 1705.50 लाख रुपये का वित्तीय बोझ पड़ेगा।

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मंत्रिमंडल की सिफारिश के साथ सहमति प्रकट करते हुए पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने फीस माफी के फैसले पर अंतिम मुहर लगाई। मुख्यमंत्री कार्यालय प्रवक्ता ने बताया कि एक अप्रैल से लेकर 30 सितंबर तक के समय के लिए होटलों और रेस्टोरेंटों के 1065 बारों की वार्षिक लाइसेंस फीस 50 प्रतिशत माफ किए जाने से खजाने पर 1355.50 लाख रुपये का वित्तीय बोझ पड़ेगा, जो कि 2020-21 के लिए अनुमानित राजस्व का आधा है।

इसी तरह ही इसी समय के लिए कुल 2324 लाइसेंस प्राप्त मैरिज पैलेसों के संबंध में यह वित्तीय बोझ 350 लाख का होगा, जो कि साल 2020-21 के अनुमानित राजस्व का आधा हिस्सा होगा। जहां तक बारों के लाइसेंसों की आगामी तिमाही अनुमानित फीस माफ करने का सवाल है तो इसमें वित्तीय बोझ की कोई गुंजाइश नहीं है, क्योंकि फीस माफी का अनुमान सिर्फ अग्रिम तौर पर एकत्रित की गई फीस संबंधी ही लगाया जा सकता है, जो कि एडजस्ट होने योग्य है। अब फीस एकत्रित किए जाने को बारों द्वारा खरीद किए जाने तक आगे करने का प्रस्ताव है।
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एसोसिएशन कर चुकी थीं मांग
होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ पंजाब, होटल रेस्टोरेंट एंड रिजॉर्ट एसोसिएशन ऑफ पंजाब और मैरिज पैलेस एसोसिएशन ऑफ पंजाब द्वारा मंत्रियों के समूह से लाइसेंस फीस और तिमाही अनुमानित फीस में छूट देने की मांग की गई थी।  कोविड-19 महामारी और इसके बाद कर्फ्यू और लॉकडाउन लगाए जाने के कारण उनके व्यापार पर बुरा प्रभाव पड़ा था। इस मसले को वित्त कमिश्नर (कर) ए वेणू प्रसाद और आबकारी कमिश्नर रजत अग्रवाल के साथ विचार किया गया और उसके बाद मुख्यमंत्री के पास मंजूरी के लिए भेजा गया था।

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