मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि सुखना झील के साथ लगते इलाके में निर्माण को लेकर हाईकोर्ट के आदेश के संबंध में उनकी सरकार लोगों के हितों की रक्षा के लिए सभी वैधानिक और न्यायिक कदम उठाएगी। उन्होंने इस संदर्भ में व्यापक रणनीति तैयार करने के लिए एक समिति का गठन करने के आदेश दिए। इस मसले पर वीरवार को उच्च स्तरीय मीटिंग की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि चंडीगढ़ में सुखना झील के आसपास बनाए गए घरों में रहते हज़ारों लोगों को उजाड़ना वाजिब नहीं होगा।
मुख्यमंत्री ने एडवोकेट जनरल अतुल नन्दा को सुखना झील के इलाके में निर्माण गिराने के लिए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश के जवाब में ज़ोरदार ढंग से पैरवी करने के लिए हरियाणा के एडवोकेट जनरल के साथ तालमेल करने को कहा। मीटिंग के बाद सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि कैप्टन ने मुख्य सचिव को एडवोकेट जनरल के कार्यालय की सहायता के लिए वन और स्थानीय निकाय विभागों से नोडल अफ़सर मनोनीत करने की हिदायत की है ताकि अदालत में राज्य की तरफ से दिए जाने वाले जवाब की पुख्ता तैयारी की जा सके।
प्रवक्ता ने आगे बताया कि मुख्यमंत्री की तरफ से गठित की गई समिति के प्रमुख, उनके मुख्य प्रमुख सचिव सुरेश कुमार होंगे जबकि मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव तेजवीर सिंह के अलावा आनंदपुर साहिब के सांसद मनीष तिवारी, विधायक परमिंदर सिंह पिंकी, फतेहजंग सिंह बाजवा और कँवर संधू और अमनदीप सिंह इसके सदस्य होंगे। यह समिति हरियाणा समेत सभी संबंधित पक्षों के साथ बहु-स्तरीय रणनीति तैयार करके भविष्य में उठाए जाने वाले कदमों का फ़ैसला करने के लिए एडवोकेट जनरल कार्यालय पंजाब के साथ परामर्श करके साझी रणनीति तैयार करेगी।
इससे पहले एजी अतुल नन्दा ने कैप्टन को इस मसले में हाईकोर्ट के आदेश के जवाब में राज्य के पास मौजूद विभिन्न रास्तों के बारे में अवगत करवाया।