पंजाब में कांग्रेस सरकार और कैप्टन अमरिंदर की शुरुआत स्टार ओपनर नवजोत सिद्धू ने की। वे शुरू से ही आक्रामक रहे और खूब सुर्खियां बटोरीं। पूरी कैबिनेट में सिद्धू ऐसे मंत्री रहे हैं, जो सबसे ज्यादा सुर्खियों में रहे। कभी डिप्टी सीएम न बनाए जाने और टीवी शो जैसे विवादों को लेकर।
कभी अपने हलके में लोगों का धन्यवाद और धुर-विरोधी अनिल जोशी के हलके में भंगड़ा डाल कर। तो कभी सदन में आप और अकाली नेताओं पर आक्रामक तेवरों के साथ तीखे हमलों को लेकर। 16 मार्च को शपथ ग्रहण के समय डिप्टी सीएम का पद नहीं मिलना, तीसरे नंबर पर शपथ लेना और अहम महकमे भी नहीं मिलना। इस सब पर अटकलें लगनी ही थीं।
पर सिद्धू ने कहा, समय आने पर बोलूंगा। 17 को कार्यभार संभालते ही दोनों विवादों पर सफाई दी। सिद्धू बोले, डिप्टी सीएम पद चाहिए होता तो अरविंद केजरीवाल पीछे पड़े थे। टीवी शो के लिए हफ्ते में एक दिन रात को फ्लाइट पकड़ कर जाऊंगा, सुबह लौट आऊंगा। 18 को टीवी शो पर विवाद उठना शुरू। 19 को मनप्रीत बादल ने की सिद्धू की हिमायत।
कॉमेडी शो में काम करने पर बवाल हुआ तो सफाई दी
Navjot singh sidhu
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बीस मार्च को सिद्धू ने कहा कि स्थानीय निकाय के साथ शहरी विकास विभाग भी होना चाहिए, जो सीएम के पास है। एक चैनल को इंटरव्यू में कैप्टन ने कहा कि सिद्धू के टीवी शो पर एडवोकेट जनरल से लेंगे राय, फिर सुर्खियों में आए सिद्धू। 21 को एजी को जांच सौंपी गई।
कैप्टन ने कहा कि जरूरत पड़ी तो उनका संस्कृति व पर्यटन मंत्रालय बदल सकते हैं। 22 को सिद्धू ने अपने विरोधी अनिल जोशी के नॉर्थ हलके में जाकर भंगड़ा डाला। उन्होंने पहले वादा किया था कि अगर सुनील दत्ती ने जोशी को हराया तो वह यहां भंगड़ा डालेंगे।
विधानसभा सत्र शुरू होने से एक दिन पहले 23 को एजी ने सिद्धू केटीवी शो को क्लीन चिट दे दी। 24 को सत्र के पहले ही दिन कैप्टन से बातचीत केदौरान सब कुछ भूल कर जोर से ठहाका लगया। अगले ही पल याद आया कि सदन में हैं तो शांत हो गए।
आप ने नारेबाजी की तो सदन में मोर्चा संभाला
नवजोत सिद्धू
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आप विधायकों ने जब सरकार के खिलाफ नारेबाजी शुरू की तो सिद्धू ने मोर्चा संभाला और जवाब में नारेबाजी शुरू कर दी। 25 को हलके में पांच घंटे चल कर लोगों का धन्यवाद किया। आलू की टिक्की खाई, प्याज और गोभी लिए, दुकानदारों को पांच-पांच सौ रुपये दिए।
एक बुजुर्ग अपंग महिला को पांच सौ के नोटों की गड्डी दे दी। 26 को भी लोगों का धन्यवाद किया। 27 को सदन में आप को घेरा। सिद्धू बोले, ये कहते थे केजरीवाल, सारा पंजाब तेरे नाल। अब लोग कह रहे हैं केजरीवाल, क्या हुआ तेरा हाल।
बहस करें, हम ठोंक कर जवाब देंगे, पर सरकार को काम तो शुरू करने दो। सदन के बाहर बोले, पंजाब को भी अमिताभ बच्चन जैसा ब्रांड एंबेसडर चाहिए। 28 को सत्र के आखिरी दिन बेहद अक्रामक तेवर दिखाए। कभी बिक्रम मजीठिया, तो कभी परमिंदर ढींढसा को आड़े हाथों लिया।