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अच्छी पहल: पंजाब में सौ फीसदी टीकाकरण वाले गांव को 10 लाख रुपये देगी कैप्टन सरकार

Tue, 18 May 2021 03:45 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

कोरोना मुक्त पिंड अभियान का मंतव्य सिर्फ जागरूकता फैलाना ही नहीं बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में उपयुक्त टेस्टिंग और टीकाकरण को भी जरूरी बनाना है।
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पंचायत प्रतिनिधियों से बात करते कैप्टन अमरिंदर सिंह। - फोटो : ANI
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विस्तार
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पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने मंगलवार को एलान किया कि राज्य सरकार के ‘कोरोना मुक्त गांव अभियान’ के अंतर्गत 100 प्रतिशत टीकाकरण का लक्ष्य पूरा करने वाले प्रत्येक गांव को 10 लाख रुपये का विकास अनुदान दिया जाएगा। मुख्यमंत्री 4000 लाइव लोकेशनों पर विभिन्न गांवों की पंचायतों के 2000 मुखियों /सदस्यों के साथ एलईडी स्क्रीन पर बातचीत कर रहे थे। 

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उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने पहले ही सरपंचों को कोविड के इमरजेंसी इलाज के लिए पंचायत फंड में से प्रति दिन 5000 रुपये की सीमा तक खर्च करने की मंजूरी दे दी है और यह सीमा 50000 रुपये तक निश्चित की है। ग्रामीण आबादी को कोरोना से बचाने और इलाज के प्रति जागरूक करने पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कार्य सिर्फ प्रचार मुहिम द्वारा ही पूरा किया जा सकता है। उन्होंने पंचायतों को विशेष मेडिकल कैंप लगाने और पूर्व सैनिकों की सेवाएं लेने को कहा। 

मुख्यमंत्री ने सरपंचों और पंचों को अपने-अपने गांवों में कोविड संक्रमित व्यक्तियों का प्रवेश रोकने के लिए ठीकरी पहरा शुरू करने, पॉजिटिव पाए जाने वाले हर व्यक्ति को फतह किट मुहैया करवाने और 94 प्रतिशत से कम ऑक्सीजन स्तर वाले व्यक्तियों का पूरा इलाज यकीनी बनाए जाने को कहा। उन्होंने ग्रामीणों से कहा कि किसी भी तरह के लक्षण नजर आने की सूरत में वह खुद को तुरंत एकांतवास कर लें और संक्रमण का जल्द पता लगाने के लिए अपनी जांच करवाएं। 
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केसों की संख्या घटी पर हालात अब भी नाजुक : कैप्टन
मुख्यमंत्री ने कहा कि कप्तान के तौर पर वह अकेले कुछ नहीं कर सकते और मिलकर यत्न किए जाने से ही लक्ष्य हासिल करने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि हालांकि रोजाना के मामलों की संख्या 17 मई को 9000 से घटकर 6947 हो गई थी लेकिन हालात अब भी नाजुक हैं और कई मौत के मुंह में जा रहे हैं, क्योंकि वह इलाज करवाने में काफी देरी कर देते हैं। इसका सबूत यही है कि स्तर-2 के बिस्तर 64 प्रतिशत तक इस्तेमाल किए जा रहे हैं, जबकि स्तर-3 पर यह संख्या 85 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। उन्होंने कहा कि यदि इन लोगों ने शुरुआती चरण में ही डॉक्टरी सहायता ली होती तो कई कीमती जानें बचाई जा सकतीं थीं।

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