कैप्टन अमरिंदर सिंह (फाइल फोटो)
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पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने बुधवार को एक बार फिर केंद्र सरकार से कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग की। उन्होंने कहा कि इसका समाधान प्रधानमंत्री के स्तर पर ढूंढना होगा। प्रधानमंत्री को अपने मंत्रियों व गृह मंत्री के साथ बैठक कर समाधान खोजना चाहिए। कैप्टन अमरिंदर ने स्पष्ट कहा है कि ये तीनों कृषि कानून किसान विरोधी हैं। हम इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।
अमरिंदर सिंह ने आगे कहा कि किसानों को विरोध करने का पूरा अधिकार है। किसानों के साथ मेरी 101 प्रतिशत सहानुभूति है। दिल्ली सीमा पर वृद्ध और महिलाएं बैठी हैं और विरोध कर रही हैं। अब तक किसान आंदोलन में 55 किसानों की मौत हो गई है। किसान अपने जीवन का बलिदान दे रहे हैं।
वे इन तीनों कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग कर रहे हैं। ऐसा नहीं हो सकता कि देश का पूरा किसान समुदाय मांग कर रहा है और सरकार गैर-जिम्मेदार हो। देश के लोगों को जवाब देना सरकार का कर्तव्य है। किसानों ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है कि कानूनों को निरस्त करना पड़ेगा।
पंजाब की कानून-व्यवस्था पर बात करते हुए कैप्टन ने कहा कि राज्य में कानून-व्यवस्था बनाए रखना मेरा कर्तव्य है और मैं किसी तरह की गड़बड़ी नहीं होने दूंगा। मैंने ऑपरेशन ब्लू स्टार, आतंकवाद का समय, सीएम की हत्या देखी है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान रोजाना ड्रोन भेज रहा है। ये ड्रोन पंजाब में या तो कश्मीर में देखे जाते हैं।
'कानूनों में ऐसा क्या कि संशोधन नहीं हो सकता'
कैप्टन ने कहा कि कोई ऐसा कानून नहीं है जिसे छुआ नहीं जा सकता। संविधान को 1950 में पेश करने के बाद 100 संशोधन हो चुके हैं।ऐसा क्या है कि इन कृषि कानूनों में संशोधन नहीं किया जा सकता है। केंद्र को इन कानूनों को वापस ही लेना होगा।
कैप्टन ने कहा कि अगर किसान कानून को वापस लेने की बात कह रहे है तो सरकार कानूनों को वापस ले सकती है। वहीं किसानों समितियों से भी बाद करें कि इन कानूनों के बाद आपको कैसे कानून चाहिए। लेकिन पंजाब में शांति और किसानों की घर वापसी के लिए ये कानून सरकार निरस्त करे।