नड्डा द्वारा राहुल गांधी पर देश का मनोबल कम करने और सशस्त्र बलों की बहादुरी पर उंगली उठाने के आरोपों का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस सांसद वास्तव में देश और हमारी सेनाओं के हितों की रक्षा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हर दूसरे भारतीय की तरह राहुल गांधी को सरकार से सवाल पूछने का हक है और उनके द्वारा उठाए गए मुद्दे यह यकीनी बनाने के लिए महत्वपूर्ण हैं कि हम दोबारा ऐसी स्थिति से न गुजरें और हमारे सैनिकों की कीमती जानों की अनावश्यक बलि न देनी पड़े, जैसे कि गलवां में हुआ।
कैप्टन ने स्टैंडिंग कमेटी वाले बयान पर नड्डा को घेरा
जेपी नड्डा ने राहुल गांधी की यह कहकर आलोचना की थी कि उन्होंने रक्षा संबंधी स्टैंडिंग कमेटी की एक मीटिंग में भी हिस्सा नहीं लिया। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कैप्टन ने कहा कि स्टैंडिंग कमेटी लड़ाई के मैदान से संबंधित जमीनी फैसले नहीं करती। उन्होंने कहा कि स्टैंडिंग कमेटी यह फैसला नहीं करती कि सैनिकों को सरहद पर जरुरी हथियारों और गोला-बारूद के साथ भेजना है या नहीं। उन्होंने कहा कि कमेटी इस स्थिति पर भी कोई नीतिगत फैसला नहीं करती कि सैनिक हथियार चलाएं या न चलाएं।
स्टैंडिंग कमेटी की बैठकें लाभप्रद नहीं: कैप्टन
सांसद के रूप में अपने पिछले कार्यकाल के दौरान रक्षा संबंधी स्टैंडिंग कमेटी के सदस्य के तौर पर अपने तजुर्बे का हवाला देते हुए कैप्टन ने कहा कि साजो-सामान/खरीद की कमी से संबंधित जो भी मसले इन बैठकों में उठाए जाते हैं, किसी भी रूप में लाभप्रद साबित नहीं होते।
मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि उन्होंने स्टैंडिंग कमेटी की बैठक में शामिल होकर गोला-बारूद की कमी का मुद्दा उठाया था। तब उनको बताया गया कि समस्या को पांच साल में हल कर लिया जाएगा। कैप्टन ने चुटकी लेते हुए कहा था, ‘‘क्या पाकिस्तान और चीन को पांच साल के लिए इंतजार करने को कह दें?’’
कारगिल जंग के दौरान महंगा गोला-बारूद खरीदा
कैप्टन ने बताया कि कारगिल जंग के दौरान भी भारत ने इजराइल और दक्षिण अफ्रीका जैसे मुल्कों से अधिक कीमत पर गोला-बारूद खरीदा था। उन्होंने कहा कि असलहे की काफी देर से चली आ रही कमी से निपटने के लिए सैनिक अभ्यास बारूद का प्रयोग करने को मजबूर हैं। उन्होंने इन बैठक को ‘चेहरा दिखाई’ वाला मंच बताया, जहां विचार-विमर्श से कोई ठोस नतीजे नहीं निकलते।