कैप्टन अमरिंदर सिंह (फाइल फोटो)
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पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने उम्मीद जताई है कि कृषि विधेयकों के खिलाफ कोविड-19 और तेज गर्मी की परवाह न करते हुए रोष-प्रदर्शन करने वाले किसानों का दर्द केंद्र सरकार तक पहुंचेगा और वह कृषि क्षेत्र को तबाही के जिस रास्ते पर डालने पर तुली है, उससे गुरेज करेगी।
मुख्यमंत्री ने चिंता जाहिर करते हुए कहा कि भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की बुरी मानसिकता के साथ तैयार असंवैधानिक कृषि विधेयकों ने किसानों को हाशिये में धकेल दिया है। इस कारण वह कोविड महामारी के दौरान सड़कों पर आकर अपना जीवन खतरे में डालने पर मजबूर हो गए हैं।
मुख्यमंत्री ने उम्मीद जाहिर की शायद पंजाब और कई अन्य राज्यों में सैकड़ों स्थानों पर हजारों की संख्या में रोष-प्रदर्शन कर रहे किसानों की हालत देखकर केंद्र सरकार का दिल पिघल जाए। शायद अब भाजपा को गलती का एहसास होगा।
आखिरी सांस तक कृषि विधेयकों का विरोध करने की वचनबद्धता दोहराते हुए कैप्टन ने राष्ट्रपति से अपील की है कि वे इन विधेयकों पर मंजूरी की मुहर न लगाएं। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि यह विधेयक लागू हो गए तो इनसे सरहदी राज्य पंजाब के लिए बहुत बुरे परिणाम निकलेंगे। उन्होंने केंद्र सरकार पर पूंजीवादी ताकतों के हितों की पूर्ति के लिए किसानों की चिंताओं को अनदेखा करने का आरोप भी लगाया।
अकाली सिर्फ कर रहे ड्रामेबाजी: कैप्टन
कैप्टन ने अकालियों पर तीखा हमले करते हुए कहा कि उनकी तरफ से इन विधेयकों संबंधी लोगों के सामने सिर्फ नाटक ही किया जा रहा है, जिसे किसान भी पूरी तरह समझते हुए अकालियों पर मगरमच्छ के आंसू बहाने के आरोप लगा चुके हैं।