कैप्टन अमरिंदर सिंह (फाइल फोटो)
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किसान नेताओं और उनके समर्थकों को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के नोटिस जारी करने की निंदा करते हुए पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने सोमवार को कहा कि डराने-धमकाने वाले ऐसे हथकंडे अपने हकों की लड़ाई लड़ने वालों को कमजोर नहीं कर सकते। मुख्यमंत्री ने पूछा कि 'क्या यह किसान अलगाववादी और आतंकवादी लगते हैं।'
उन्होंने केंद्र को आगाह करते हुए कहा कि ऐसे ओछे तरीके किसानों को कमजोर करने के बजाय उनको अपना रुख और सख्त करने पर मजबूर करेंगे। अगर स्थिति हाथ से बाहर निकल गई तो इस पर काबू पाने के लिए भाजपा के सबसे शक्तिशाली नेता भी कुछ नहीं कर सकेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कृषि कानूनों से पैदा संकट को हल करने के बजाय केंद्र सरकार आंदोलनकारी किसानों और उनके समर्थकों को परेशान करने की कोशिश कर रही है। यह जाहिर है कि केंद्र सरकार को न तो किसानों की चिंता है और न ही उनकी मानसिकता की समझ है। पंजाबी स्वभाव से ही जुझारू होते हैं और उनकी जूझने की भावना उनको दुनिया में सर्वोत्तम योद्धा बनाती है।
एक महीना पहले पंजाब के कई आढ़तियों को आयकर का नोटिस भेजे जाने और अब एनआईए की तरफ से किसानों को नोटिस भेजे जाने का हवाला देते हुए कैप्टन ने कहा कि यह हरकतें आंदोलन वापस लेने के लिए दबाव डालने के लिए की जा रही हैं। यदि केंद्र सरकार को कोई शर्म है तो वह तुरंत ही कृषि कानूनों को वापस ले।
किसानों को धमकाना मोदी सरकार का निंदनीय कार्य : भगवंत मान
आम आदमी पार्टी ने भी किसानों और उनकी सहायता करने वाले लोगों और संगठनों को भेजे जा रहे एनआईए के नोटिस के लिए मोदी सरकार की आलोचना की है। आप पंजाब अध्यक्ष और सांसद भगवंत मान ने कहा कि किसान आंदोलन को कुचलने के लिए केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग करना निंदनीय है।
मान ने कहा कि किसानों और कृषि को बचाने के लिए आंदोलन का समर्थन करने वाली विभिन्न सेवा समितियों, संगठनों को नोटिस भेजना अत्यंत घृणित काम है, जो अभी मोदी सरकार कर रही है। पहले मोदी सरकार के मंत्री और भाजपा नेताओं ने किसानों को पाकिस्तान और चीन का एजेंट, खालिस्तानी व आतंकवादी कहकर आंदोलन की छवि धूमिल करने की कोशिश की और अब आंदोलन को दबाने के लिए सरकारी एजेंसियों के माध्यम से आंदोलन को सहयोग करने वाले लोगों को नोटिस भेज रही है।