त्ता में आने के बाद पंजाब के सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने पूर्व मंत्री बिक्रम मजीठिया केपरिवार पर पहला वार किया है। सरकार ने मजीठिया के पिता सत्यजीत मजीठिया द्वारा स्थापित खालसा यूनिवर्सिटी को बंद करने की तैयारी कर ली है।
सीएम की प्रधानगी में पंजाब भवन में हुई पंजाब कैबिनेट की दूसरी मीटिंग में खालसा यूनिवर्सिटी एक्ट रद करने का फैसला किया गया। अकाली-भाजपा सरकार ने निजी यूनिवर्सिटी बनाने को यह एक्ट बनाया था। खालसा कॉलेज की गवर्निंग काउंसिल में पूर्व मंत्री बिक्रम मजीठिया के पिता सत्यजीत मजीठिया काबिज थे, जिसके चलते सरकार ने कानून पास कर लिया, लेकिन इसका अमृतसर के लोगों, विद्यार्थियों, पूर्व विद्यार्थियों और फैकल्टी ने काफी विरोध किया था। कैप्टन खुद इसके विरोध में हुए धरने में शामिल हुए थे। उन्होंने वादा किया था कि कांग्रेस के सत्ता में आते ही इस एक्ट को रद्द किया जाएगा।
खालसा कॉलेज की विरासत को बचाया जाएगा। पंजाब सरकार ने 125 साल पुराने ऐतिहासिक खालसा कॉलेज के विरासती रुतबे के खो जाने से बचाने को खालसा यूनिवर्सिटी एक्ट-2016 रद करने का फैसला किया। सीएम ने कालेज की विरासत की रक्षा करने का वादा किया जो विरासती दर्जे वाली मुल्क की सबसे पुरानी शिक्षण संस्थाओं में से एक है। सरकारी प्रवक्ता ने कहा कि कैबिनेट ने कहा है कि खालसा कालेज सोसाइटी द्वारा इस गौरवशाली संस्था को यूनिवर्सिटी में बदल कर इसके विरासती दर्जे को तहस-नहस करने की कोशिश की। सरकार ने अमृतसर के लोगों, बुद्धिजीवियों, कॉलेज के पूर्व विद्यार्थियों के कड़े विरोध के बावजूद खालसा यूनिवर्सिटी स्थापित की थी।
सियासी बदले की कार्रवाई : मजीठिया
विवादित खालसा यूनिवर्सिटी एक्ट रद्द
कैबिनेट ने कहा कि अमृतसर में और यूनिवर्सिटी की जरूरत नहीं है। वहां पहले ही गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी जैसा राष्ट्रीय संस्थान है। गुरु राम दास यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज है और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट जैसा राष्ट्रीय संस्थान है। यूनिवर्सिटी के लिए कॉलेज की जमीन लेने से इसके अस्तित्व पर बुरा प्रभाव पड़ेगा। इसकी इमारत की विलक्षण पहचान खो जाएगी। कैबिनेट ने कहा कि कॉलेज की पहचान और इससे संबंधित सभी जायदादों को ज्यों का त्यों रखना चाहिए ताकि इसकी शान और विलक्षणता को संभाला जा सके।
सियासी बदले की कार्रवाई : मजीठिया
खालसा कॉलेज गवर्निंग काउंसिल ने कैबिनेट की ओर से खालसा यूनिवर्सिटी एक्ट को रद्द करने के फैसले को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। यूनिवर्सिटी के चांसलर सत्यजीत मजीठिया और प्रो-चांसलर रजिंदर मोहन छीना ने कहा कि वे यूनिवर्सिटी को बचाने के लिए कानूनी राय लेंगे। उन्होंने कहा कि यह कदम सियासी बदले की भावना से उठाया गया है, जबकि, यूनिवर्सिटी से सीमांत जिले के एजुकेशन सेक्टर को काफी प्रोत्साहन मिलना था। सरकार का यह तथ्य भी बेबुनियाद है कि खालसा कॉलेज के हैरिटेज स्वरूप को खतरा है, क्योंकि यूनिवर्सिटी अलग बिल्डिंग में है। उन्होंने कहा कि सरकारें शिक्षण संस्थान स्थापित करती हैं, यह पहला मौका है जब सरकार सियासी कारणों से कोई संस्थान बंद करवा रही है।