मुख्यमंत्री कार्यालय के प्रवक्ता ने बताया कि इस प्रोजेक्ट के तहत जहां जल संबंधी बुनियादी ढांचे में निवेश होगा, वहीं जल सप्लाई और सैनिटेशन सेवा की मजबूती के लिए नए संस्थागत मॉडल की स्थापना की जाएगी और वित्तीय उपयोगिता व उपभोक्ताओं के हितों को भी ध्यान में रखा जाएगा। इसके अलावा कोविड -19 की महामारी के मद्देनजर पैदा होने वाली चुनौतियों का सामना करने को पंजाब सरकार और राज्य की म्युनिसिपल काउंसिलों की क्षमता को बढ़ाने के संबंध में मदद इस प्रोजेक्ट के अंतर्गत मुहैया करवाई जाएगी।
अमृतसर में जमीन अधिगृहित, लुधियाना में तैयारी
अमृतसर और लुधियाना में नहरों के करीबी पंपिंग स्टेशनों और साफ पानी जमा करने वाले टैंकों सहित वाटर ट्रीटमेंट प्लांटों के निर्माण के लिए जमीन की जरूरत क्रमश: 40 एकड़ और 50 एकड़ है। अमृतसर में लैंड एक्युजेशन कलेक्टर द्वारा आपसी सहमति से तय की गई राशि 36.40 करोड़ रुपये की कीमत पर गांव वल्लां में अपर बारी दोआब कैनाल के साथ लगती जमीन अधिगृहित कर ली गई है। लुधियाना में गांव रामपुर के नजदीक जमीन की पहचान कर ली है और बातचीत से जमीन एक्वायर करने की कोशिश जारी है।
मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व में पंजाब मंत्रिमंडल ने बुधवार को जेल वार्डों के 305 पदों को पंजाब अधीनस्थ चयन सेवा बोर्ड (पीएसएसएसबी) के अधिकार क्षेत्र से निकालकर पंजाब पुलिस भर्ती बोर्ड द्वारा प्रत्यक्ष तौर पर भरे जाने को मंजूरी दे दी। मुख्यमंत्री कार्यालय के प्रवक्ता के अनुसार यह फैसला जेलों के प्रबंधन में सुधार के लिए उपयुक्त स्टाफ क्षमता मुहैया करवाने में सहायक होगा।
यह समूची भर्ती प्रक्रिया चार महीनों के अंदर पूरी की जाएगी। पंजाब की जेलों में मौजूदा समय 24 हजार से ज्यादा मुजरिम/हवालाती बंद हैं। इनकी निगरानी के लिए जरूरी स्टाफ की कमी है। 27 नवंबर, 2016 में नाभा जेल ब्रेक की घटना के बाद स्टाफ की कमी ज्यादा महसूस की जा रही थी और कैबिनेट के अनुसार ऐसी घटनाओं को रोके जाने के लिए स्टाफ की क्षमता बढ़ाने की जरूरत है।
नाभा जेल ब्रेक की घटना की जांच के लिए गठित उच्चाधिकार प्राप्त कमेटी की तरफ से भी जेल में घटना का मुख्य कारण स्टाफ की कमी भी बताया था। इसी दौरान कैबिनेट की तरफ से साल 2017 के लिए गृह मामले और न्याय विभाग की सालाना प्रशासकीय रिपोर्ट को भी मंजूरी दे दी गई है।