पंजाब सरकार ने आखिरकार ट्रक यूनियनों पर शिकंजा कस दिया, यूनियनों पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी गई है। बुधवार को हुई कैबिनेट की मीटिंग में पंजाब गुड्स कैरेजेज (रेगुलेशन एंड प्रिवेंशन ऑफ कार्टिलाइजेशन रूल्स) को हरी झंडी दे दी है, जिससे पंजाब में ट्रक यूनियनों केखात्मे का रास्ता साफ हो गया है। वहीं, पंजाब ट्रक ऑपरेटर यूनियन ने इसके खिलाफ वीरवार को पटियाला में राज्यस्तरीय रैली का एलान कर रखा है।
नए नियमों के तहत अब माल ढुलाई केकारोबार में लगे लोग यूनियन या गुट नहीं बना सकेंगे। सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह की अगुवाई में हुई कैबिनेट मीटिंग के बाद सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि प्रस्तावित नियमों पर तीस दिन तक एतराज या टिप्पणी सुने जाएंगे। इन नियमों का मकसद माल ढुलाई में लगे ट्रांसपोर्टरों में माफिया खत्म करना है, जिसने पिछले वर्षों के दौरान गुटबाजी के साथ व्यापार पर कब्जा कर लिया है, जिससे वस्तुओं की निष्पक्ष ढुलाई में बाधा आ रही है।
इससे औद्योगिक विकास पर भी बुरा प्रभाव पड़ा है। ट्रक यूनियन खत्म करने के साथ सरकार ने ट्रक ऑपरेटरों के हितों की रक्षा का भी प्रबंध किया है। अब न्यूनतम और अधिकतम भाड़ा भी सरकार तय करेगी। गीले व सूखे लोड केआधार पर प्रति किलोमीटर के हिसाब से भाड़ा तय किया जाएगा।
न गुट बना सकेंगे, न किसी को खेप ले जाने कर सकेंगे इनकार
Punjab Cabinate
- फोटो : File Photo
पशुओं की ढुलाई, अलग-अलग धरातलों, तेल की लागत, रख रखाव, वेतन व अन्य सभी कारकों को ध्यान में रख कर ही भाड़ा तय किया जाएगा। इन नियमों केलागू होने के बाद किसी भी ऑपरेटर या ढुलाई का परमिट प्राप्त ऑपरेटर को अपना गुट बनाने की आज्ञा नहीं होगी। उसे खेप व खेप भेजने वाले केसंबंध में पसंद के बारे में इनकार की इजाजत नहीं होगी।
कोई भी ऑपरेटर या माल ढुलाई का परमिट होल्डर किसी दूसरे ऑपरेटर को कारोबार चलाने को अपने साथ जुड़ने को मजबूर नहीं कर सकेगा। कोई भी ऑपरेटर या परमिट होल्डर किसी भी खेप या खेप भेजने वाले को सेवाएं देने से इनकार नहीं कर सकेगा। कोई ऑपरेटर या परमिट होल्डर जोकि पंजाब के किसी भी क्षेत्र से वस्तुएं उठाना चाहता है, उसे कोई दूसरा ऑपरेटर रोक नहीं सकेगा।
सुखबीर का शिवालिक बोर्ड हुआ भंग
पंजाब कैबिनेट ने शिवालिक धौलाधार टूरिज्म बोर्ड को भंग करने को मंजूरी दी है। इसका गठन पूर्व डिप्टी सीएम सुखबीर बादल की अगुवाई में किया गया था। कैबिनेट ने रणजीत सागर झील में थीम डैम केआसपास केइलाकों को टूरिस्ट स्पॉट के तौर पर विकसित करने का काम पीआईडीबी को सौंपने का फैसला किया। प्रवक्ता ने कहा कि इससे कमजोर आर्थिकता का सामना कर रही राज्य सरकार को अनावश्यक वित्तीय बोझ से राहत मिलेगी। बोर्ड ने पीपीपी की ओर से पीआईडीबी के फंड से उस क्षेत्र के विकास की प्रक्रिया शुरू की थी, लेकिन इसके लिए पीआईडीबी के पास फंड और तजुर्बा, दोनों हैं, बोर्ड पूरी तरह फिजूल है।