पंजाब सरकार ने पेंशन और आटा-दाल स्कीम जैसी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ देने को पात्रता के लिए सालाना आय की सीमा बढ़ा कर साठ हजार रुपये कर दी है। साथ ही स्व-सत्यापन लागू करके लाभ प्राप्त करने में आने वाली अड़चनों को कम करने का फैसला लिया है।
पंजाब कैबिनेट का मानना था कि अयोग्य लाभपात्रियों को निकालने के लिए चल रही जांच प्रक्रिया केकारण आय की सीमा बढ़ाने से खजाने पर अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा। सरकारी प्रवक्ता ने कहा कि आटा-दाल स्कीम के तहत लाभ केलिए आय के मानदंड दोबारा निर्धारित किए गए हैं। आय की सीमा पति-पत्नी के लिए तीस हजार रुपये थी, जिसे बढ़ा कर साठ हजार कर दिया गया है। शहरों की तरह ग्रामीण इलाकों में भी बुढ़ापा पेंशन और अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं केअधीन भुगतान सीधे बैंक खातों में ट्रांसफर करने का फैसला किया गया है।
अभी तक भुगतान पंचायतों के जरिए होता था। नए नियमों के अनुसार आवेदक सरकारी या निजी नौकरी नहीं करता होना चाहिए, ब्याज, किराए या अन्य सोर्स से सालाना आय साठ हजार से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। दंपति को स्व-घोषणापत्र देना होगा कि उनकेपास नहरी-वाही ढाई एकड़ से अधिक, बरानी पांच एकड़ और सेम प्रभावित इलाके में पांच एकड़ से ज्यादा जमीन नहीं है। पेंशन मंजूरी करने केअधिकार अब बाल विकास परियोजना अधिकारी और नगर काउंसिल के कार्यकारी अधिकारी व सचिव, नगर निगम को दिए गए हैं। जिलास्तर पर पेंशन स्वीकृति केलिए जिला सामाजिक सुरक्षा अधिकारी समर्थ अथॉरिटी होगा। स्कीम की निगरानी का काम भी जिलास्तर पर होगा। कैबिनेट ने रीयल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी के नोटिफिकेशन को भी मंजूरी दी।
साथ ही उम्मीद जताई कि इससे रीयल एस्टेट एपिलेट ट्रिब्यूनल के गठन का रास्ता साफ होगा। प्लॉटों, इमारतों की बिक्री पारदर्शी ढंग से होगी, उपभोक्ताओं को हित सुरक्षित होंगे। कैबिनेट ने जिला परिषद के तहत 1186 सब्सिडिरी सेहत केंद्रों में ठेके पर काम कर रहे फार्मासिस्ट और दर्जा चार मुलाजिमों के कार्यकाल में 31 मार्च 2018 तक बढ़ोतरी को मंजूरी दी है। फार्मासिस्ट का वेतन सात से बढ़ाकर आठ हजार और दर्जा चार का तीन से बढ़ा कर चार हजार रुपये प्रतिमाह करने को स्वीकृति दी। सीएम के सियासी सचिवों व वीआईपी मेडिकल टीम के सलाहकार डॉ. विजय हरजाई की शर्तों व नियमों को भी मंजूरी दी गई।
सड़कों पर दौड़ रही अवैध बसों पर लगेगी लगाम
Punjab Cabinate meeting
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सरकार बदलने के बाद भी सड़कों पर दौड़ रही अवैध बसों पर लगाम लगेगी। सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने बुधवार को इस संबंध में कड़े निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने रीजनल ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी और विजिलेंस को इस संबंध में दस दिनों में रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं।
विधानसभा केबजट सत्र को अंतिम रूप देने को बुलाई गई कैबिनेट की बैठक के दौरान सीएम ने अवैध बसों को लेकर हिदायतें जारी कीं। सीएम ने पंजाब की सड़कों पर सरकार की चेतावनी के बाद भी दौड़ रही अवैध बसों संबंधित रिपोर्ट को गंभीरता से लिया है। उन्होंने कहा कि ये बसें बेगुनाह लोगों की जान केलिए खतरा बन रही हैं। उन्होंने सभी आरटीए को फौरन अवैध बसों पर कार्रवाई करने को कहा। इन बसों द्वारा कानून के घोर उल्लंघन का नोटिस लेते हुए सीएम ने स्पष्ट किया कि इस मामले में कोई भी ढील बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
इसमें कोताही करने वाले मुलाजिमों को दोषी पाए जाने पर सख्त सजा दी जाएगी। सीएम ने सूबे में हर तरह के माफिया को खत्म करने की अपनी वचनबद्धता दोहराई। उन्होंने इस पर चिंता जताई कि ट्रांसपोर्ट माफिया अभी भी लगातार बसें चला रहा है। सीएम ने ट्रांसपोर्ट अधिकारियों को चेतावनी दी कि अगर वे नियमों का उल्लंघन करने वालों को रोकने में नाकाम रहे तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। सीएम ने विजिलेंस को भी इन बस ऑपरेटरों की शिनाख्त करके कार्रवाई करने को कहा। साथ ही अधिकारियों से जल्द ट्रांसपोर्ट नीति को अंतिम रूप देने को कहा।
सियासतदानों का पसंदीदा रहा है ट्रांसपोर्ट कारोबार
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सियासतदानों का पसंदीदा रहा है ट्रांसपोर्ट कारोबार
पंजाब में ट्रांसपोर्ट कारोबार हमेशा से सियासतदानों का पसंदीदा रहा है। इसमें अकालियों के साथ-साथ कांग्रेसी भी शामिल हैं। पिछली सरकार में सबसे ज्यादा वर्चस्व पूर्व डिप्टी सीएम सुखबीर बादल की बसों का था। उनकी तीन ट्रांसपोर्ट कंपनियों की तमाम बसों पर बिना परमिट दौड़ने केआरोप लगते रहे हैं।
ऑर्बिट की बसों से हुए हादसे भी विवादों में रहे हैं। उनके ही एक और सहयोगी की जुझार ट्रांसपोर्ट की बसें भी बेरोक-टोक चलती रही हैं। वहीं, कांग्रेस के अवतार हेनरी और सुखदेव सिंह लिबड़ा जैसे नेताओं की भी इस कारोबार में पैठ रही है। वित्तमंत्री मनप्रीत बादल भी इस कारोबार में हैं, इसलिए उन्होंने ट्रांसपोर्ट नीति से खुद को पहले ही अलग कर लिया है।
ट्रांसपोर्ट माफिया का खात्मा करे सरकार : फूलका
आप नेता एचएस फूलका ने कहा है कि सरकार बदलने के बाद भी ट्रांसपोर्ट माफिया पर कोई असर नहीं पड़ा है। माफिया अब भी करोड़ों के ट्रांसपोर्ट कारोबार पर काबिज है। पिछली सरकार ने पांच हजार अवैध रूट बांटे थे। कैप्टन सरकार में भी वह चल रहे हैं। इससे साफ है कि अंदरखाते कांग्रेसी और अकाली मिले हुए हैं।