पंजाब सरकार का बजट पूरी तरह चुनावी है। जिन क्षेत्रों को बजट आवंटित किया गया है, वहां से वोट कैसे हासिल होंगे, उसका पूरा ध्यान रखा गया है। उम्मीद थी कि किसानों को अपने पैरों पर खड़ा करने के लिए बड़ी योजना आएगी, जो कि नहीं हुआ।
कर्ज माफी के माध्यम से किसानों को बैसाखी थमा दी गई है, यह कोई स्थायी समाधान नहीं है। किसान इससे उबर नहीं पाएंगे। उन्हें अपने पैरों पर खड़ा करने के लिए ऐसी योजनाओं की जरूरत है कि वे बैसाखी छोड़कर लंबी दौड़ लगा सकें।
अर्थव्यवस्था के साथ कृषि का पुराना नाता है। अर्थव्यवस्था तभी मजबूत होगी, जब कृषि को अपने पैरों पर खड़ा करेंगे। अन्यथा सरकार कर्ज में डूबती जाएगी। पंजाब सरकार पहले ही कर्ज में है। इस बार फिर ऐसे आंकड़े प्रस्तुत कर दिए गए कि आने वाले समय में सकट खड़ा होगा। आमदनी के साधन उतने ही हैं लेकिन खर्च अधिक कर दिया गया। इससे सरकार पर कर्जा और बढ़ेगा।
सबसे अधिक जरूरत कृषि को प्राइस स्टेबलाइजेशन फंड की थी। इसके तहत मध्य प्रदेश की तर्ज पर फसलों के रेट तय करने थे, ताकि किसानों को निर्धारित से कम दाम कहीं नहीं मिल सकें। इस योजना पर काम करने के बजाय किसानों के कर्ज माफी की ओर कदम बढ़ाए गए।
इससे खेती के हालात नहीं सुधरेंगे। वर्ष 2008 में कर्ज माफी की गई थी और 10 साल बाद वर्ष 2018 में कर्ज माफी की गई। सरकार को चाहिए था कि बजट के जरिए उन फसलों के रेट निर्धारित करने चाहिए थे जिनका मूल्य केंद्र सरकार तय नहीं करती।
इस बजट के जरिए पंजाब सरकार ने 1712 करोड़ रुपये कर्ज माफी के लिए निर्धारित किए हैं। चावल व गेहूं की पैदावार करने वाले किसानों को 7180 करोड़ की बिजली मुफ्त दी जाएगी। ऐसी सुविधाओं के जरिए किसान लंबे समय तक खड़े नहीं हो सकते। क्योंकि किसान को चाहिए कि उसकी फसलों का मूल्य सही मिले। इसके लिए बाजारों की स्थापना करनी चाहिए। साथ ही सब्जियों व फलों के दाम निश्चित करने चाहिए। यानी किसान को खुद खड़े होने दें।
उन्हें बैसाखी न पकड़ाएं। यही नहीं छठे वेतनमान का लाभ कर्मचारियों को देने की बात कही गई है जबकि शिक्षकों का जिक्र नहीं किया गया। यूजीसी (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) की गाइडलाइन के मुताबिक शिक्षकों को सातवां वेतनमान मिलना चाहिए।
पंजाब की आमदनी बढ़ाने के लिए उद्योगों को पुनर्जीवित करना होगा। लंबे समय बनी रहने वाली योजनाएं लानी होंगी। जब टैक्स अधिक आएगा तो प्रदेश तरक्की करेगा। फिलहाल टैक्स कलेक्शन तक नहीं हो पा रहा है। कुछ जगहों पर टैक्स चोरी तक हो रहा है। ऐसे हालात में अर्थव्यवस्था दौड़ नहीं लगा पाएगी।
- प्रो. सतीश वर्मा, आरबीआई चेयर प्रोफेसर, चंडीगढ़।