पंजाब को कर्ज से उबारने के लिए हर बार की तरह कर्ज चुकाने में बजट की बड़ी राशि खर्च होगी। इस बार बजट में 2.63 लाख करोड़ के कर्ज को चुकाने के लिए 15946 करोड़ रुपये का व्यय किया जाएगा। यह राशि कुल बजट का 10 प्रतिशत है। वित्त मंत्री ने बजट पेश करने के दौरान आय और व्यय का पूरा लेखा-जोखा रखा। उन्होंने बताया कि केंद्रीय फंड और करों के जरिये राज्य को कुल बजट का 29 प्रतिशत राशि मिल पाएगी।
विधानसभा सत्र के तीसरे दिन सोमवार को पहला बजट पेश करते वक्त वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने राज्य में आने वाले रुपये के स्रोतों का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि बजट का 19 प्रतिशत हिस्सा 28731 रुपये केंद्रीय ग्रांटों के जरिये आएगा। इसके अलावा केंद्रीय करों के हिस्से के रूप में 14757 करोड़ रुपये मिलेंगे।
यह बजट का कुल अनुमान का 10 प्रतिशत हिस्सा है। बजट का 13 प्रतिशत हिस्सा वे एंट मींस एडवांसेज 20000 करोड़ रुपये आएंगे। पब्लिक डेब्ट एक्सक्लूडिंग वेज एंड मीन्स एडवांसेज के जरिये 35051 करोड़ बजट का कुल अनुमान तीन प्रतिशत, राज्य की अपने कर से आमदनी के तौर पर 45588 करोड़ बजट का कुल अनुमान का 30 प्रतिशत, राज्य के अपने गैर कर से आमदन के तौर पर 6302 करोड़ रुपये बजट का कुल अनुमान का चार फीसदी और नॉन डेब्ट रिसीट्स के तौर पर 700 करोड़ रुपये कुल अनुमान का एक प्रतिशत आय के रूप में मिलेंगे। वहीं व्यय के रूप में पिछले कर्ज की अदायगी व ब्याज चुकाने में 15946 करोड़ रुपये कुल बजट का खर्च होगा। पेंशन और सेवानिवृत्त लाभ देने के लिए सरकार ने 15146 करोड़ रुपये खर्च का अनुमान लगाया है।
राजस्व और पूंजीगत पर 52473 का खर्च
पंजाब में व्यय के रूप में सबसे अधिक खर्च पूंजीगत और राजस्व पर होगा। बजट का 33 प्रतिशत हिस्सा इन दोनों मदों पर खर्च होगा। कुल अनुमान के मुताबिक पूंजीगत खर्च 10981 करोड़ रुपये और राजस्व खर्च 41492 करोड़ रुपये अनुमानित किया गया है।