पंजाब विधानसभा के शीतकालीन सत्र के आखिरी दिन सदन में एकाएक सियासत गर्मा गई। सरकार ने बैंस बंधुओं के खिलाफ निंदा प्रस्ताव लाकर हैरान कर दिया। वहीं, नेता प्रतिपक्ष सुखपाल खैरा सत्ताधारियों की इस चाल में उलझ कर रह गए हैं। संसदीय कार्यमंत्री ब्रह्म मोहिंदरा ने प्रस्ताव रखा कि बैंस ब्रदर्स ने ऑडियो रिलीज किया। इसमें एक जज पर 35 लाख लेने के आरोप लगाए गए, जो कि सियासत से प्रेरित थे। यह न्यायपालिका को बदनाम करने का प्रयास है। सदन इसकी निंदा करता है।
साथ ही चीफ जस्टिस से मांग करते हैं कि इस मामले का संज्ञान लेकर इसकी जांच कराई जाए, न्यायपालिका की गरिमा बहाल की जाए। प्रस्ताव आते ही खैरा फट पड़े। उन्होंने कहा कि दलालों ने भ्रष्टाचार की बात की, प्रस्ताव से उनकी मदद की जा रही है। एक दिन पहले चीफ जस्टिस ने उनकी बात सुन कर भरोसा दिया है कि उनके साथ नाइंसाफी नहीं होगी। सदन को मेरा सपोर्ट करना चाहिए था, इससे ज्यादा निंदनीय कुछ नहीं होगा।
आप विधायक कंवर संधू ने कहा कि बिना इस मुद्दे पर बहस कराए ही प्रस्ताव लाया गया। ब्रह्म मोहिंद्रा ने कहा कि सिर्फ हाईकोर्ट से जांच की मांग की गई है। इस प्रस्ताव के जरिए सरकार ने स्पष्ट कर दिया कि वह न्यायपालिका के साथ है, न कि खैरा के। इसका सीधा असर खैरा के खिलाफ चल रहे केस पर भी पड़ सकता है। वहीं, सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि न्यायपालिका के खिलाफ किसी भी तरह के आरोप लोग रद्द कर देंगे। रक्षा सेनाएं और न्यायपालिका ही दो ऐसी संस्थाएं हैं, जिन पर लोगों का पूरा भरोसा है।
बैंस ब्रदर्स द्वारा जारी ऑडियो का मकसद खैरा पर चल रहे आरोपों से ध्यान हटाना है। अगर आप के पास इसकी थोड़ी बहुत भी प्रमाणिकता होती हो जारी करने से पहले उसे चीफ जस्टिस के पास जाना चाहिए था।