पंजाब विधानसभा के बजट सत्र के तीसरे दिन शुक्रवार को किसानों की कर्ज माफी को लेकर अकाली विधायकों ने कार्यवाही शुरू होते ही वेल में पहुंचकर नारेबाजी शुरू कर दी। हंगामे के कारण सदन की कार्रवाई न होने से गुस्साए कैप्टन अमरिंदर सिंह ने इस पर कहा कि उनके पास 10 अकाली नेताओं की सूची है, जो अवैध माइनिंग के धंधे में लगे हैं। वे चाहे तो अभी सदन में उनके नाम उजागर कर दें, लेकिन वे ऐसा नहीं कर रहे। कैप्टन का इतना कहना था कि अकाली सदस्य वेल से चुपचाप अपनी सीटों पर जाकर बैठ गए।
शुक्रवार सुबह सदन की कार्यवाही शुरू होते ही अकाली दल के विधायक किसानों का कर्ज माफ करने और कर्जा कुर्की रोकने की मांग को लेकर नारेबाजी करने लगे। वे सीटें छोड़कर वेल में पहुंच गए। प्रश्नकाल के दौरान कैबिनेट मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू ने जब पानी पर चलने वाली बस के मुद्दे पर अकाली दल पर निशाना साधा तो माहौल और बिगड़ गया। अकाली नेता वेल में ही खड़े सिद्धू का विरोध करने लगे तो कांग्रेस सदस्य ट्रेजरी सीटों से उठकर वेल में अकाली सदस्यों के सामने आ गए।
दोनों तरफ से तू तू-मैं मैं होने का नजारा सदन में दिखाई दिया। इसके बाद मार्शलों ने सिद्धू को सुरक्षा घेरे में ले लिया। शोरगुल के बीच स्पीकर को सदन की कार्यवाही पहले आधा घंटा और फिर दस मिनट के लिए स्थगित करनी पड़ी। कार्यवाही शुरू होने पर शोरगुल से आहत सदन के नेता और मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने आखिरकार माइक संभाल लिया। इसके बाद ही अकाली शांत हुए।
मैं शर्मिंदा हूं, इस सदन का नेता हूं : कैप्टन
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कैप्टन अमरिंदर सिंह ने विपक्षी दलों से कहा कि अकाली दल सदन में हंगामा करके सत्ता पक्ष पर दबाव बनाना चाहता है, लेकिन मुझ पर कोई दबाव नहीं है। उन्होंने स्पीकर को संबोधित करते हुए कहा कि सदस्यों का व्यवहार बहुत बुरा है।
कर्ज माफी और कर्जा कुर्की हटाना कांग्रेस सरकार के मैनिफेस्टो में शामिल है। इनको (शिअद) पता है कि इस सत्र के दौरान ही बिल आएगा, लेकिन अकाली दल इसका श्रेय लेने के लिए यह काम कर रहा है। सदन के हालात इतने खराब हो गए हैं कि कोई स्पीकर पर कागजात फेंक रहा है। मुझे अफसोस है कि सदन में गुंडागर्दी चल रही है। मैं ऐसे सदन का नेता हूं, यह सोचकर ही मुझे शर्म आ रही है।
मैंने अपने लंबे राजनीतिक जीवन में कभी ऐसी स्थिति नहीं देखी थी। कैप्टन ने कहा कि पूर्व सरकार के कार्यकाल में 7000 किसानों ने आत्महत्या कर ली, लेकिन उस समय अकालियों को किसानों की चिंता नहीं हुई। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार सारे वादे पूरे करेगी, लेकिन उसे काम करने का अवसर तो दो। अभी सरकार को केवल तीन महीने हुए हैं।