इस बार चुनाव से पहले बन रहे सियासी परिदृश्य को देखा जाए तो हालात वर्ष 2022 सरीखे नहीं हैं। वर्ष 2017 में आप ने 20 सीटें जीतकर पंजाबियों के समक्ष सूबे में एक राजनीतिक विकल्प पेश किया था। हालांकि उस वक्त पार्टी बहुमत के आंकड़े (59 सीटें) से बहुत दूर थी लेकिन उसने अपनी मजबूत संगठनात्मक रणनीति और प्रभावशाली मुद्दों के बूते वर्ष 2022 में कुल 117 में से 92 सीटों पर कब्जा कर अपने दम पर सरकार बनाई। उस वक्त पंजाब में बदलाव की लहर जोरों पर थी और आप पंजाबियों के दिलों में अपनी जगह बना चुकी थी।
इस बार फरवरी 2027 में प्रस्तावित विधानसभा चुनाव के मद्देनजर परिस्थितियां कुछ अलग हैं। सूबे में बढ़ती नशा और हथियार तस्करी, बिगड़ती कानून-व्यवस्था तथा कर्मचारियों और पेंशनरों में रोष जैसे बड़े मुद्दों की वजह से सत्तारूढ़ आप की राह अबकी बार आसान नहीं है। हालांकि, सरकार अपने विकास मॉडल और कुछ नई गारंटियों के साथ एक बार फिर मतदाताओं का भरोसा जीतने के लिए चुनावी रण में उतरेगी लेकिन विरोधियों का खेमा और उनकी रणनीति भी इस बार कमजोर नहीं दिख रही है।
पहली सूची में कई दिग्गजों के नाम कटे
दरअसल, आप के उम्मीदवारों की पहली सूची में बहुत से विधायकों को उम्मीद थी कि उनके नाम पर इस बार भी मुहर लग जाएगी। अधिकतर मंत्री तो अपना नाम पक्का मानकर ही चल रहे थे लेकिन 40 उम्मीदवारों की सूची में मुख्यमंत्री समेत केवल दो मंत्रियों के नाम ही शामिल थे। इनमें से एक मंत्री संजीव अरोड़ा ईडी के एक मामले में गुरुग्राम जेल में बंद हैं। इसी वजह से आप के विधायकों और मंत्रियों में इस वक्त खासी हलचल है। इस हलचल को संतुलित रखना आप के लिए बड़ी चुनौती से कम नहीं है।