फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

चुनाव परिणाम तय करेंगे शिअद-भाजपा गठबंधन का भविष्य

Thu, 09 Feb 2017 01:16 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
विज्ञापन
पीएम मोदी और बादल - फोटो : File Photo
विज्ञापन
पंजाब में दस साल से सत्तारूढ़ शिरोमणि अकाली दल (शिअद) और भाजपा गठबंधन का भविष्य आगामी 11 मार्च को आने वाले विधानसभा चुनाव नतीजों पर निर्भर करेगा। यह आशंका बीते तीन-चार माह के दौरान सूबे में चुनाव प्रचार के दौरान दोनों दलों के बीच नजर आई दूरियों ने पैदा की है। प्रचार के दौरान शिअद जहां अपने हिस्से की सीटों और वहां घोषित प्रत्याशियों तक सीमित रही, वहीं भाजपा ने सूबे में आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू होने तक न तो अपने प्रत्याशी घोषित किए और न ही प्रचार को लेकर शिअद की तरह सक्रिय हुई।
विज्ञापन


यही नहीं, दोनों दलों के स्टार कैम्पेनरों ने भी अपने-अपने प्रत्याशियों के हलकों में ही प्रचार किया। दोनों दलों के बीच हर चुनाव से पहले होने वाले सीटों के बंटवारे और अदला-बदली के मामले में भी इस बार शिअद ने भाजपा को अनदेखा करते हुए अपनी 94 सीटों पर प्रत्याशी उतार दिए।

चुनाव आचार संहिता लागू होते ही सूबे में चुनाव लड़ रहे सभी दलों की सक्रियता बढ़ गई थी। प्रदेश के नेताओं के साथ-साथ सभी दलों के स्टार कैम्पेनरों ने भी मोर्चा संभाल लिया था। शिअद के अलावा मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल, उप मुख्यमंत्री सुखबीर बादल, केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने विभिन्न हलकों का दौरा कर शिअद प्रत्याशियों के लिए प्रचार किया तो भाजपा प्रत्याशियों के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह, केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह, अरुण जेटली और स्मृति ईरानी ने विभिन्न हलकों में कई प्रचार सभाएं कीं। खास बात यह रही कि गठबंधन के रूप में चुनाव लड़ रहे दोनों दलों के स्टार कैम्पेनरों ने एक-दूसरे के प्रत्याशियों के हलकों में कदम नहीं रखा। 
विज्ञापन
विज्ञापन

विधानसभा चुनाव प्रचार में भी एक-दूसरे से अलग दिखे दोनों दल

- फोटो : File Photo
यह भी देखा गया कि प्रधानमंत्री और केंद्रीय नेताओं को अपने प्रत्याशियों के प्रचार के लिए बुलाने को लेकर शिअद ने भी कोई खास उत्साह नहीं दिखाया। कोटकपूरा में प्रधानमंत्री की जनसभा में शिअद नेता व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल शरीक हुए और नोटबंदी के बारे में बोले, लेकिन इसके बाद उन्होंने किसी भी हलके में शिअद प्रत्याशियों के लिए प्रचार करते हुए नोटबंदी का जिक्र तक नहीं किया।

अकेले मालवा क्षेत्र की 69 सीटों में से 62 पर शिअद और 7 पर भाजपा चुनाव लड़ रही है। हालांकि, इसी क्षेत्र से जो भी पार्टी या गठबंधन ज्यादा से ज्यादा सीटें जीतता है, सूबे में हमेशा सरकार उसी की बनती रही है। इसके बावजूद भाजपा नेताओं ने इस क्षेत्र की अपनी सात सीटों के लिए भी उत्साह नहीं दिखाया। जाहिर है, डेरा सच्चा सौदा के समर्थन से अगर 11 मार्च को घोषित होने वाले चुनाव परिणाम में मालवा में शिअद अच्छी स्थिति में रही और भाजपा अधिक सफलता हासिल नहीं कर सकी तो दोनों दलों के बीच दूरी और बढ़ सकती है।

इसका एक कारण यह भी है कि वर्ष 2012 में बनी सरकार के कार्यकाल के दौरान ही शिअद तलवंडी साबो, संगरूर के उपचुनाव जीतकर विधानसभा में अपने दम पर बहुमत में आ गई थी, लेकिन पार्टी ने भाजपा को दरकिनार नहीं किया। अब चुनाव नतीजों के बाद इस गठबंधन पर नए सिरे से मंथन शुरू हो सकता है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें