साल 2017 में होने वाले पंजाब विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा ने बड़े बदलावों की कवायद शुरू कर दी है। दरअसल, भाजपा अकाली दल की उन सीटों में बदलाव करना चाहती है, जहां पिछले दो चुनाव में अकाली दल के उम्मीदवार का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा।
पिछले दिनों प्रदेश के दौरे पर आईं केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी ने भी इस तरफ संकेत देते हुए कहा था कि अकाली दल के साथ कुछ सीटें बदलने पर भाजपा गंभीरता से विचार कर रही है। भाजपा के इस कदम से उन क्षेत्रों के वर्करों और नेताओं में उत्साह बढ़ा है, जहां अकाली दल के साथ सीट बदलने का मुद्दा उठा है।
यही हाल अकाली नेताओं और वर्करों का है। उनका मानना है कि दोनों पार्टियों में आपसी सलाह से कुछ अदला-बदली होती है तो उन्हें नेतृत्व का मौका मिल सकता है।
सुखबीर बोले, संख्या को लेकर दोनों दलों में कोई विवाद नहीं
सुखबीर बादल के लिए जीत दिलाने का फॉर्मूला भी है और अभिशाप भी
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हालांकि, भाजपा का कोई नेता अभी सीटों के संबंध में खुलासा करने से परहेज कर रहा है, लेकिन उनका कहना है कि इस पर काम चल रहा है। वर्तमान में पंजाब की कुल 117 सीटों में से 23 पर भाजपा उम्मीदवार और शेष पर अकाली प्रत्याशी मैदान में उतरते आए हैं।
अकाली दल के अध्यक्ष और उपमुख्यमंत्री सुखबीर बादल ने भी स्वीकार किया है कि यदि भाजपा कुछ सीटों को बदलना चाहती है तो उस पर गंभीरता से विचार किया जा सकता है, लेकिन दोनों दलों के सीटों की हिस्सेदारी पुरानी ही रहेगी। सीटों पर उठे विवाद पर खुद सुखबीर बादल ने कहा है कि संख्या को लेकर दोनों दलों में कोई विवाद नहीं है।
राज्य में सीटों की अदला-बदली पर पंजाब सरकार के सलाहकार और भाजपा नेता विनीत जोशी ने कहा कि भाजपा प्रदेश प्रधान और अकाली दल के बीच बातचीत चल रही है। आपसी सहमति से ही फैसला लिया जाएगा। उधर, अकाली नेता व सिंचाई मंत्री शरणजीत सिंह ढिल्लों ने कहा कि इस संबंध में कोई भी फैसला पार्टी अध्यक्ष सुखबीर बादल लेंगे।