मानव जीवन कीमती है और इसे बचाना जरूरी है। स्ट्रे डॉग्स को न हटाना मानव जीवन से ज्यादा महत्व डॉग्स को देने जैसा है। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट की यह टिप्पणी सुखना लेक को बचाने के लिए स्वत: संज्ञान याचिका पर सुनवाई के दौरान आई। जस्टिस एके मित्तल पर आधारित खंडपीठ ने कहा कि यदि लेक पर पालतू कुत्तों को लेकर जाना प्रतिबंधित है तो ऐसे में स्ट्रे डॉग्स को वैध कैसे मान सकते हैं।
मामले की सुनवाई आरंभ होते ही हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन से स्ट्रे डॉग्स पर जवाब मांगा। म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन की ओर से मजबूरी बताते हुए कहा गया कि 2001 के नियमों के अनुसार स्ट्रे डॉग्स को जहां से उठाया जाता है, वहीं उन्हें छोड़ना जरूरी है। वहीं सुप्रीम कोर्ट के 2015 में जारी अंतरिम आदेशों की भी जानकारी दी गई, जिसके अनुसार देश का कोई भी हाईकोर्ट स्ट्रे डॉग्स को लेकर आदेश जारी नहीं कर सकता। हाईकोर्ट ने कहा कि लेक आम नागरिकों के लिए है और नागरिकों की सुरक्षा के लिए लेक पर पालतू डॉग्स को भी ले जाने की अनुमति नहीं है।
वहीं दूसरी ओर स्ट्रे डॉग्स को न हटाना लोगों की सुरक्षा और उनके जीवन को खतरे में डालने जैसा है। हाईकोर्ट ने एमिकस क्यूरी से उनका पक्ष रखने को कहा। एडवोकेट तनु बेदी ने कहा कि स्ट्रे डॉग्स को लेकर जिन आदेशों और नियमों की बात की जा रही है वह डॉग बर्थ को लेकर है। इन आदेशों में स्ट्रे डॉग्स कंट्रोल को लेकर कुछ भी नहीं है। हाईकोर्ट ने 2001 में बनाए गए रूल्स और 2015 के सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को रिकार्ड पर ले लिया। हाईकोर्ट ने बढ़ती आवारा कुत्तों की संख्या पर चिंता जताते हुए एमिकस क्यूरी को आदेश दिए कि वे अगली सुनवाई पर बताएं कि क्या हाईकोर्ट किसी प्रकार इस मामले में आदेश जारी कर सकता है।